Ira Web Patrika
अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
विद्युत प्रभा चतुर्वेदी 'मंजू' के दोहे

चिंता  बुरी  बलाय  है, रहिए  इससे   दूर।
प्रभु चिंतन उर धारिए, शांति मिले भरपूर।।

डॉ० चन्द्रभान चन्द्र के घनाक्षरी छन्द

बुद्ध ने कहा है जो जरूरत से ज्यादा होता,
वही तो जहर बन मानव को मारता।
सत्ता धन भूख लोभ अभिमान बढ़ता तो,
धीरे-धीरे मानव चरित्र को है मारता।

शकुंतला अग्रवाल 'शकुन' के पर्यावरण विषयक दोहे

होकर व्याकुल प्यास से, बैठा पथिक उदास।
दूर  तलक  होता नहीं,  पानी का अनुभास।।

मनोज शुक्ल 'मनुज' के छन्द

त्याग की है नींव प्रेम,ज्ञान से भी श्रेष्ठ प्रेम,
प्रेम बांधता है देव, दनुज को नर को।
वासना से मुक्त प्रेम,जीव की है शक्ति प्रेम,
प्रेम दूर करता है, मन के भी डर को।