Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
सरोज सिंह 'सूरज' के छन्द

भले हो कितना भी संत्रास
भोर आएगी रख विश्वास ।
देख तटरेखा है अब पास ।
अरे नाविक रख मन में आस।।

सरोज सिंह 'सूरज' के छन्द

भले कितनी गहरी हो पीर 
नयन तू मत बरसाना नीर ।
न खोना रे मन तू विश्वास  
तेरा कट जायेगा बनवास ।।

राहुल शिवाय के दोहे

चाहे तुम मेरा कहो, या अपनों का स्वार्थ।
मैं अंदर से बुद्ध हूँ, ऊपर से सिद्धार्थ।