Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
आशा अमित नशीने के सवैया छन्द

बिन कंत तमी चुभती तन में,
खुशियाँ विरहाकुल से बाधित। 
दृग वाण लगें उर में रति के,
अनुराग असीमित है स्पंदित। 
प्रिय संगम से चिर यौवन है,
मधु स्पर्श परस्पर है अंकित। 
प्रिय का परिरम्भ सुवासित है,
गठबंधन से खुशियाँ पूरित। 

गरिमा सक्सेना के दोहे

तार-तार होती रही, फिर भी बनी सितार।
नारी ने हर पीर सह, बाँटा केवल प्यार।।

श्वेता राय के सवैया छन्द

अंग अनंग तरंग उठाकर प्रेम सुधा बिखरावत नैना।
मान बसे मनुहार लिए उर चैन चुराय रिझावत नैना।