Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
सुरेश चन्द्र 'सर्वहारा' के दोहे

बिना प्रेम के ज़िंदगी, है बिल्कुल बकवास।
सुंदर पर बिन काम की, जैसे गाजरघास।।

डॉ० शैलेष गुप्त 'वीर' के दोहे

पहनेंगे अब कोट सब, खायेंगे अखरोट।
चीलों के इस दाँव पर, बरस रहे हैं वोट।।

राजपाल सिंह गुलिया के दोहे

बड़ा बहुत संसार में, भूख नाम का रोग।
मिटा सका जिसको यहाँ, कहो कौनसा योग।।

प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून' के दोहे

 
बचपन हुआ वयस्क सम, अनगिन हुए  विकार।
इस युग में दुर्लभ हुआ बाल सुलभ  व्यवहार ।।