Ira Web Patrika
अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
मौसम ट्रंपियाना- फारूक आफरीदी

मीडियापर्सन की हालत उस विद्यार्थी जैसी, जिसे हर उत्तर के बाद यही सुनने को मिले- 'रोंग, नेक्स्ट!' फिर आया 'दीवार दर्शन'- एक ऐसी दीवार, जो सिर्फ़ ईंट-पत्थर की नहीं, बल्कि विचारों, भय और पहचान की। यह दीवार जितनी ज़मीन पर खड़ी होती, उससे कहीं ज़्यादा लोगों के मन में खड़ी हो जाती। बादल भी सोचते- 'किधर से बरसें कि वीज़ा न माँग लिया जाए!' विदेश नीति तो मानो शतरंज की बिसात, जहाँ चालें नियमों से कम और मूड से ज़्यादा तय होती रहती।

आमिर ख़ान की शादी और लोगों का दर्द - मुकेश नेमा

आमिर ख़ान को बधाई। मात्र इकसठ साल के ये बाँके जवान भाग्यशाली है। सिल्वर स्क्रीन पर ख़ुद से आधी उम्र की कन्याओं से रोमांस करने के साथ साथ ये सुख उन्हें अपने घर मे भी हासिल है। सठिया चुके आमिर इस बार गोरी गौरी स्प्रेट के दूल्हा बने हैं। इनकी तारीफ़ इसलिए भी की जाना चाहिए क्योंकि ये इनकी तीसरी दुल्हन हैं और ये हर बार पिछली बीवी से पाँच बरस छोटी लड़की तलाश लेते हैं। ज़ाहिर है इस ख़बर से रंडुए रो पीट रहे हैं और उन कुँवारों की छाती पर साँप लोट रहे हैं। 

लद्दो देवी और ड्राइविंग का लोकतंत्र- - प्रीति 'अज्ञात'

लोग कहते हैं, डर का भी एक संस्कार होता है, हमारी लद्दो देवी उसी कुल की कन्या थीं। बचपन में साइकिल चलाने से डर, कॉलेज में स्कूटर से डर, शादी के बाद कार से डर और बुढ़ापे में ओला-उबर से प्यार; लद्दो देवी का विकास-क्रम यही रहा।

लोकतंत्र की गाड़ी चल पड़ी, पम पम पम-डॉ० मुकेश असीमित

लोकतंत्र की इस गाड़ी का डिज़ाइन भी निराला है। टायर में ट्यूब नहीं, बल्कि वादों की हवा भरी गई है। इंजन? जी हाँ, वो पुराने, झूठे भाषणों की गर्मी से चलता है। और सीटें? भाई, सीटें आरक्षित हैं– सामान्य जनता के लिए 'जनरल डिब्बा' है, खचाखच भरा। जनता भीड़ में ही सुकून महसूस करती है। अकेले बैठने में डर लगता है।