Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
लोकतंत्र की गाड़ी चल पड़ी, पम पम पम-डॉ० मुकेश असीमित

लोकतंत्र की इस गाड़ी का डिज़ाइन भी निराला है। टायर में ट्यूब नहीं, बल्कि वादों की हवा भरी गई है। इंजन? जी हाँ, वो पुराने, झूठे भाषणों की गर्मी से चलता है। और सीटें? भाई, सीटें आरक्षित हैं– सामान्य जनता के लिए 'जनरल डिब्बा' है, खचाखच भरा। जनता भीड़ में ही सुकून महसूस करती है। अकेले बैठने में डर लगता है।

कवि की कार और आलोचक का अलाऊंस- डॉ० प्रमोद सागर

अब जनाब, यात्रा आत्मा की नहीं, इंस्टाग्राम की है। पहले कवि मन से उतरता था, अब 'मॉडल पोज़' में।
अब कवि का दर्द पेट्रोल की तरह है- महँगा भी, ज्वलनशील भी, और कुछ-कुछ फेक भी।

सैयारा का तैयारा- दिलीप कुमार सिंह

इस फ़िल्म में युवक-युवतियाँ (जिन्हें अब ज़ेन ज़ी भी कहा जाता है) अपने वर्तमान प्रेम के साथ फ़िल्म देखने जाते हैं और अपने भूतपूर्व प्रेम (एक्स) को याद करके दहाड़ें मारकर रोते हैं। मैं भी अपनी दफ़्तरी नीरस और उबाऊ दिनचर्या से ऊबकर कर यह ज़ेन ज़ी, मिलेनियल और अल्फ़ा जेनेरेशन की फ़िल्म देखने चला गया।

देवलोक का अमृतकाल बनाम मृत्युलोक में मानवता का पतनकाल- डॉ० मुकेश 'असीमित'

देवर्षि नारद ने इंद्र राजा के कटाक्ष को नज़रअंदाज़ करते हुए कहा, "देवराज इंद्र! तुम अपने देवत्व पर जो फूल रहे हो न, तुम ही बताओ देवता, दानव और मानव में श्रेष्ठ कौन है?"