Ira Web Patrika
अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
बदलता मौसम और बदलती संवेदनाएँ - अलका मिश्रा

इरा वेब पत्रिका का यह अंक इस बार आपके पास अत्यंत विलंब से आ रहा है इसके लिये हम आपसे क्षमाप्रार्थी हैं। इस विलंब के पीछे हमारी टीम की कुछ व्यक्तिगत परेशानियाँ रहीं जिसके कारण पत्रिका पर काम करना संभव न हो सका। आगे से पत्रिका अपने निर्धारित समय से आपके पास पहुँच सके इसके लिये हमने इसके स्वरूप को ‘मासिक' से ‘द्विमासिक' करने का निर्णय लिया है। आशा है कि आपका स्नेह एवं सहयोग पहले की भाँति हमें प्राप्त होता रहेगा।  

विकसित-शिक्षित समय में भी ताक़त मनुष्यता पर हावी है- के० पी० अनमोल

मनुष्य ने अपना जीवन, अपनी जाति को तो ख़तरे डाला ही है, पूरी सृष्टि और तमाम जीव-जन्तुओं का जीना भी हराम किया हुआ है। सार यही समझ आता है कि इस प्रजाति का मूल स्वभाव विध्वंस का ही है।

स्मृति से संकल्प तक- अलका मिश्रा

गोविन्द गुलशन जी की शायरी, उनका मार्गदर्शन और उनका स्नेह आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रकाश-पुंज बनकर रहेगा। यह विशेषांक उसी स्मृति, उसी कृतज्ञता और उसी प्रकाश को समर्पित है।

नववर्ष एवं गणतंत्र दिवस की आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ- अलका मिश्रा

साहित्य समाज का दर्पण ही नहीं, बल्कि संवेदना की वह चेतना है, जो मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती है। नववर्ष अपने साथ नवीन ऊर्जा, नवीन स्वप्न और नवीन दृष्टि लेकर आता है, और हम भी इन्हीं मूल्यों के साथ आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं।