Ira Web Patrika
अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
ब्रजकिशोर वर्मा 'शैदी' की गोविन्द गुलशन की स्मृतियों को समर्पि नज़्म 'आज हर आँख है नम'

लौट पाएगी भला क्या वो आबो-ताब कभी,
सानिहा मौत का बनकर सवाल आया है।
क्यों न ग़मगीन हो मालाजी इस अज़ीयत पर?
रौनके-बारादरी पर ज़‌वाल आया है।।