Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
डॉ० उपमा शर्मा के उपन्यास 'अनहद' की सातवीं कड़ी

सच वो देव के बिना कहाँ रह पाती थी? पर कैसे समझाये इन सबको कि देव गये कहाँ हैं? यहीं हैं पल-पल उसी के साथ। न जाने कब वापस आ जाएँ। वो नहीं मिली घर में तो कहाँ तलाशेंगे? वापस चले गये फिर से तो। उसे देव का इंतज़ार करना ही होगा। फिर कैसे जा सकती है वो इस घर से, जो उसके और देव के प्यार का मन्दिर है।

प्रगति गुप्ता के उपन्यास 'पूर्णविराम से पहले' की बीसवीं कड़ी

जीवन की दौड़ में साथ चलते लोग, विश्राम घाट पर पहुँचते ही स्मृतियों में बदलने लगते हैं।

डॉ० उपमा शर्मा के उपन्यास 'अनहद' की छठवीं कड़ी

योग का मतलब ही है, मन की शांति और योग से क्या होता है? स्वयं की जागृति। संगीत भी साधना है। योग भी साधना है। और यही नाद योग की उपलब्धि है देव।

प्रगति गुप्ता के उपन्यास 'पूर्णविराम से पहले' की उन्नीसवीं कड़ी

इस उम्र में अकेले रह जाने का डर व्यक्ति को कमजोर कर देता है। यही वजह थी कि शिखा अपने मन को सतत खोल रही थी।