Ira Web Patrika
मार्च 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आप सभी को नवरात्रि एवं ईद की हार्दिक शुभकामनाएँ। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
डॉ० उपमा शर्मा के उपन्यास 'अनहद' की आठवीं कड़ी

कुछ एहसास रूई के मानिंद नर्म और मुलायम होते हैं देव! कुछ एहसास रूह से परे मन को मुट्ठी में बाँध, आकाश में हल्के-हल्के उड़ते रहते हैं। एहसास! हाँ तुम्हारा मेरे क़रीब होने का एहसास, मन की धरती को प्रेम- प्यार में भिगोकर रखता है। तुम मेरे आस-पास हो। तुम्हारे होने के नर्म अहसास के घेरे ने मुझे चारों ओर से घेर रखा है।

प्रगति गुप्ता के उपन्यास 'पूर्णविराम से पहले' की इक्कीसवीं कड़ी

शिखा की बात सुनकर दोनों देवर भावुक हो उठे। जब दोनों ने बहू के बारे में पुनः पूछा तो शिखा ने चुप्पी साध ली, क्योंकि इस बात का उसके पास कोई जवाब नहीं था। आजकल कोई भी कितना क़रीबी ही क्यों न हो, बहुत प्रश्न नहीं पूछता। सच तो यह भी है कि कोई ज़्यादा जवाब नहीं देना चाहता। आज आत्मीयता भी औपचारिकताओं को ओढ़कर आती है।

डॉ० उपमा शर्मा के उपन्यास 'अनहद' की सातवीं कड़ी

सच वो देव के बिना कहाँ रह पाती थी? पर कैसे समझाये इन सबको कि देव गये कहाँ हैं? यहीं हैं पल-पल उसी के साथ। न जाने कब वापस आ जाएँ। वो नहीं मिली घर में तो कहाँ तलाशेंगे? वापस चले गये फिर से तो। उसे देव का इंतज़ार करना ही होगा। फिर कैसे जा सकती है वो इस घर से, जो उसके और देव के प्यार का मन्दिर है।

प्रगति गुप्ता के उपन्यास 'पूर्णविराम से पहले' की बीसवीं कड़ी

जीवन की दौड़ में साथ चलते लोग, विश्राम घाट पर पहुँचते ही स्मृतियों में बदलने लगते हैं।