Ira Web Patrika
अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
फ़ानी जोधपुरी की ग़ज़लें

उर्दू ग़ज़ल की लम्बी और समृद्ध परम्परा का एकदम ताज़ादम चेहरा हैं फ़ानी जोधपुरी। इनकी ग़ज़लें पारंपरिकता का जितना अच्छा निर्वहन करती हैं, उतनी ही ताज़गी के साथ अपनी विधा को सींच रही हैं। इनकी ग़ज़लों में जीवन की जद्दोजहद से उपजा नैराश्य बराबर देखने में मिलता है लेकिन इस नैराश्य के बीच उम्मीद की रौशनी कभी धीमी नहीं पड़ती। यह उम्मीद इनके लेखन की ही नहीं, हमारे वर्तमान और भविष्य की भी घनघोर ज़रूरत है। दुनिया की उपस्थिति तथा उसकी समझ फ़ानी की ग़ज़लों को 'मास्टरपीस' बनाती हैं।

शमीम हयात की ग़ज़लें

शमीम हयात की ग़ज़लें ठण्डी और ताज़ी बयार के झौंके की तरह हैं। ये ग़ज़लें कहन और कथ्य दोनों में नवीनता लिए हुए हैं। इसमें स्व तथा पर दोनों ही अनुभूतियाँ पूरी जीवंतता से उपस्थित हैं। कई जगह सरोकार सम्पन्नता भी प्रभावी है।

- के० पी० अनमोल

गोविन्द गुलशन की बीस ग़ज़लें

बेहद सादा और आसान ज़ुबान में हर आम और ख़ास के मन की बातों को शायरी में ढालते हैं गोविन्द गुलशन साहब। जहाँ इनकी ग़ज़लों के शिल्प और भाषा एकदम पके-पकाये मालूम पड़ते हैं, वहीं इनका कथ्य बिलकुल हमारे जीवन का, हमारे मन का होता है। गुलशन साहब की शायरी में शायरी का परंपरागत स्वरूप अपने आपको संरक्षित पाता है। वहीं दुनिया की समझ और इनका अपना कहन उसे और ख़ास बनाते हैं।

- के० पी० अनमोल

विकास की ग़ज़लें

विकास की ग़ज़लें अपने समय की तल्ख़ अभिव्यक्ति है। वे पूरी ग़ज़लीयत के साथ, बड़े सलीक़े से हमारे दौर के ज़रूरी विषय अपनी ग़ज़लों में पिरोते हैं। इनकी ग़ज़लों के आईने में सियासत, समाज और उस समाज का आम आदमी, सभी अपना अक्स बहुत साफ़-साफ़ देख सकते हैं। इनके पास बेबाक कहन है और उतने ही बेबाक विषय उठाने की हिम्मत भी। बहुत सादगी और संजीदगी के साथ ग़ज़ल में विकास साधनारत हैं। मज़बूत कथ्य के साथ-साथ इनकी ग़ज़लों की अपनी ज़मीनें तथा उनके रदीफ़ भी सम्मोहित करते हैं।

- के० पी० अनमोल