Ira Web Patrika
अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
डॉ० शैलेष गुप्त 'वीर' के दोहे

पहनेंगे अब कोट सब, खायेंगे अखरोट।
चीलों के इस दाँव पर, बरस रहे हैं वोट।।

राजपाल सिंह गुलिया के दोहे

बड़ा बहुत संसार में, भूख नाम का रोग।
मिटा सका जिसको यहाँ, कहो कौनसा योग।।

प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून' के दोहे

 
बचपन हुआ वयस्क सम, अनगिन हुए  विकार।
इस युग में दुर्लभ हुआ बाल सुलभ  व्यवहार ।।

के० पी० अनमोल के दोहे

दिल से दिल की बात का, कैसे हो इज़हार।
भाव हज़ारों हैं मगर, शब्द नहीं हैं चार।।