Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
के० पी० अनमोल के दोहे

दिल से दिल की बात का, कैसे हो इज़हार।
भाव हज़ारों हैं मगर, शब्द नहीं हैं चार।।

विद्युत प्रभा चतुर्वेदी 'मंजू' के दोहे

चिंता  बुरी  बलाय  है, रहिए  इससे   दूर।
प्रभु चिंतन उर धारिए, शांति मिले भरपूर।।

डॉ० चन्द्रभान चन्द्र के घनाक्षरी छन्द

बुद्ध ने कहा है जो जरूरत से ज्यादा होता,
वही तो जहर बन मानव को मारता।
सत्ता धन भूख लोभ अभिमान बढ़ता तो,
धीरे-धीरे मानव चरित्र को है मारता।

शकुंतला अग्रवाल 'शकुन' के पर्यावरण विषयक दोहे

होकर व्याकुल प्यास से, बैठा पथिक उदास।
दूर  तलक  होता नहीं,  पानी का अनुभास।।