Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
प्रवीण श्रीवास्तव 'प्रसून' के दोहे

 
बचपन हुआ वयस्क सम, अनगिन हुए  विकार।
इस युग में दुर्लभ हुआ बाल सुलभ  व्यवहार ।।

के० पी० अनमोल के दोहे

दिल से दिल की बात का, कैसे हो इज़हार।
भाव हज़ारों हैं मगर, शब्द नहीं हैं चार।।

विद्युत प्रभा चतुर्वेदी 'मंजू' के दोहे

चिंता  बुरी  बलाय  है, रहिए  इससे   दूर।
प्रभु चिंतन उर धारिए, शांति मिले भरपूर।।

डॉ० चन्द्रभान चन्द्र के घनाक्षरी छन्द

बुद्ध ने कहा है जो जरूरत से ज्यादा होता,
वही तो जहर बन मानव को मारता।
सत्ता धन भूख लोभ अभिमान बढ़ता तो,
धीरे-धीरे मानव चरित्र को है मारता।