Ira Web Patrika
अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
कंचन पाठक के घनाक्षरी छन्द

ऐसे तके चितचोर भीग जाए पोर- पोर,
प्रेम में विभोर रूप उनका ललाम है।

नील में उजास घोल मिसरी के जैसे बोल,
क्षण - क्षण हिया हूक उठता अनाम है।

डॉ० भावना तिवारी के दोहे

पिया तुम्हारे देश में, नहीं प्रीति का मोल।
अमृत के पहले यहाँ, विष देते हैं घोल।।

मनोज कुमार शुक्ल 'मनुज' के घनाक्षरी छन्द

ज्ञान,भक्ति,आत्मसुख, परमार्थ, दिव्यता की,
कृष्ण हैं अगर चाभी राधिका जी ताला हैं।

मनोज कुमार शुक्ल 'मनुज' के छन्द

नव वर्ष दिव्यता दे दीप्त यह जीवन हो ,
ज्ञान, मान, यश नित्य - नित्य बढ़ता रहे।