Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
आशा राय नशीने के पंच चामर छन्द

न हर्ष हो न शोक हो, सुमार्ग ही चले चलो,
सुगम्य  राह  क्यों  मिले,सदैव वक्त में ढलो।
प्रपंच से  बचे  रहो, प्रकाश ज्ञान का बनो,
विरक्ति  मार्ग स्वर्ग का,प्रवाह ध्यान का बनो।

शैलेन्द्र शर्मा के दोहे

 
गंगा-यमुना- ताप्ती,  भिन्न-भिन्न  पहचान। 
सागर से मिलकर सभी, होतीं एक समान।। 

मनोज शुक्ल 'मनुज' के घनाक्षरी छन्द

हरियाली हर ओर दिखती है भूमि पर,
देह यष्टि वृष्टि से सुहानी कर  देती  है।

भर देती पोखर, सरोवर,नदी  व  झील,
नलिनी को कुमुद की रानी कर देती है।

सीमा वर्णिका के दोहे

 
होली गोकुलधाम में, मस्ती पर है जोर।
रंगे सभी अबीर से , जुड़ी प्रेम की डोर।।