Ira Web Patrika
अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
सरोज सिंह 'सूरज' के छन्द

भले कितनी गहरी हो पीर 
नयन तू मत बरसाना नीर ।
न खोना रे मन तू विश्वास  
तेरा कट जायेगा बनवास ।।

राहुल शिवाय के दोहे

चाहे तुम मेरा कहो, या अपनों का स्वार्थ।
मैं अंदर से बुद्ध हूँ, ऊपर से सिद्धार्थ।

डॉ० सुरेश कुमार शुक्ल के घनाक्षरी छन्द

भक्ति सूत्र मे पिरोये छन्द छन्द मोतियों से 
प्रेम की सुगन्ध दिव्य आपको रिझायेगी। 
यति-गति-लय को सम्हाल तो न पाया नाथ!
मति की विफलता ज़रूर आड़े आयेगी।