Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
'अकारण' शीर्षक से पवन शर्मा की पाँच कविताएँ

अकारण ही कभी
दिल को सुकून मिलता है
जब कोई पुराना गीत बज उठता है
उस गीत का कोई तर्क नहीं
सिर्फ़ धड़कनों से जुड़ा रिश्ता है

सुशांत सुप्रिय की कविताएँ

इस धरती पर
अपने शहर में मैं
एक उपेक्षित उपन्यास के बीच में
एक छोटे-से शब्द-सा आया था

डॉ० स्वदेश भटनागर की कविताएँ

देह के भूगोल की कार्यप्रणाली का यह सच
मुझे ब्रह्मांड की किताब का
सबसे सुंदर चित्र बना देता है

डॉ० नवीन दवे मनावत की कविताएँ

क्यों छीनकर हम मजबूरन
प्रेम को आमंत्रित करते हैं?
यह आलिंगन, चुंबन, रति
नहीं है देह की चाह
केवल और केवल है
प्रेम का निर्जीव निर्माण
जो प्रेम का प्राण नहीं, प्रयाण है
जिस पर हँसती हर युग की एक निश्छल पीड़ा।