Ira Web Patrika
अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
विजय सिंह नाहटा की कविताएँ

विजय सिंह नाहटा की कविताएँ अपने समय के सन्दर्भों से टकराकर उसी बेचैनी को जीती हैं, जिन्हें उनका समाज जीने को अभिशप्त है। तीखी और मारक कहन के माध्यम से कवि अपनी कविताओं को एक औजार में बदलने को तत्पर दिखता है। एक ऐसा औजार, जो अपने उधड़े हुए दौर की तुरपाई कर सके। इस जद्दोजहद में स्मृति, प्रकृति और कविता उनके 'ठहराव-बिंदु' की तरह खड़े दिखते हैं।

डाॅ० सुरंगमा यादव की कविताएँ

डाॅ० सुरंगमा यादव की प्रस्तुत कविताएँ हमारे समय में चटकते हुए संबंधों की मूक वेदना हैं, अस्तित्व का संघर्ष हैं और आस की बची हुई लौ हैं। इन कविताओं में हमारा वर्तमान और उस वर्तमान की चुनौतियाँ सहजता के साथ उपस्थित दिखती हैं। ये कविताएँ एक अनुभवी के परामर्श की भांति भी सहेजे जाने योग्य हैं।

- के० पी० अनमोल

सुरजीत की कविताएँ

सुरजीत भारतीय मूल की प्रवासी साहित्यकार हैं। उनकी रचनाओं में जीवन साँस लेता है, लेकिन चुप्प- शांत-हौले-से। उनके सृजन में एक ठहराव है, एक जीवन-लय है, एकान्त की नीरवता है, नीरवता जीवन से भरी हुई। उनकी रचनाओं में स्मृतियाँ हैं, स्वाभिमान है और जंगल, पेड़, चिड़ियाँ आदि अनेक ज़रूरी तत्वों की मौजूदगी है। सबसे अहम है इनकी रचनाओं का सूफ़ियाना ढंग, जो शायद पंजाब प्रान्त की मिट्टी अथवा लोक- परिवेश से आता है। सुरजीत की कविताएँ जीवन में गूँथी हुई अपनी ही धुन की लयात्मक अभिव्यक्ति हैं।

- के० पी० अनमोल

'अकारण' शीर्षक से पवन शर्मा की पाँच कविताएँ

अकारण ही कभी
दिल को सुकून मिलता है
जब कोई पुराना गीत बज उठता है
उस गीत का कोई तर्क नहीं
सिर्फ़ धड़कनों से जुड़ा रिश्ता है