Ira Web Patrika
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कैलाश बाजपेयी के हाइकु

विभिन्न विधाओं में सजग लेखन कर रहे सुकवि और सुधी सम्पादक कैलाश बाजपेयी जी का कार्य हाइकु विधा में भी उल्लेखनीय है। उनके हाइकु-काव्य में प्रकृति-प्रेम और जीवन-दर्शन का सुन्दर संगम है। उनमें कम शब्दों में गहरा भाव व्यक्त करने की कला है। बाजपेयी जी के हाइकुओं में सामाजिक चेतना झलकती है तो कहीं-कहीं व्यंग्य और चिंता भी परिलक्षित है। सरल भाषा और गहन अर्थ युक्त उनके हाइकु पाठक को सोचने पर विवश करते हैं और अंत में एक शांत अनुभूति छोड़ जाते हैं।

- डॉ० शैलेष गुप्त 'वीर'

बबीता कुमावत के नारी विषयक हाइकु

पढ़ी-लिखी नारी ने दुनिया को तो बदला ही है, अपनी दुनिया को भी बहुत बेहतर किया है। ज्ञान नारी के लिए बहुत आवश्यक है और ज्ञानी नारी संसार के लिए। पढ़-लिखकर नारी ने किस तरह अपना जीवन सँवारा है और किस तरह बदलाव की सकारात्मक स्थितियाँ पैदा की हैं, बबीता कुमावत जी ने उन्हें अपनी हाइकु रचनाओं के माध्यम बहुत अच्छी तरह अभिव्यक्त किया है। इन रचनाओं में महिला सशक्तीकरण की झलक भी है तथा महिलाओं के संघर्ष और उस संघर्ष की जीत की आभा भी।

- के० पी० अनमोल

चक्रधर शुक्ल के हाइकु

हिन्दी काव्य के समकालीन परिदृश्य में चक्रधर शुक्ल का नाम महत्त्वपूर्ण है। बाल कविता, क्षणिका काव्य और व्यंग्य उनके लेखन के प्रमुख आयाम हैं। यद्यपि उन्होंने हाइकु विधा में भी पर्याप्त लेखन कार्य किया है। उनके हाइकु उनकी रचनाधर्मिता के विशिष्ट उदाहरण हैं। इन हाइकुओं में उन्होंने जीवन के विभिन्न क्षेत्रों और भावनाओं को प्रस्तुत किया है। शुक्ल जी के हाइकु संक्षिप्त और प्रभावशाली हैं। उन्होंने अपने विचारों को प्रभावी अभिव्यक्ति प्रदान की है। उनके हाइकुओं में प्रकृति का सुन्दर वर्णन है, जैसे कि नदी का पानी, तितलियों का फूलों को परखना और मौसम की क्रूरता आदि। शुक्ल जी के हाइकुओं में मानव जीवन की विसंगतियों का अंकन है। साथ ही उनके हाइकुओं में भावनात्मक अभिव्यक्ति है, जैसे कि आँखों में पीर, मन अधीर, और तितली का डरना आदि। वे हाइकु को अधिक प्रभावी बनाने के लिए संकेतात्मक भाषा का उपयोग प्रभावी विधि से करते हैं। जैसे कि 'नदी का पानी/ गाँव में चढ़ आया/ सन्नाटा छाया' में नदी का पानी सामाजिक समस्याओं का प्रतीक है। वरिष्ठ रचनाधर्मी श्री चक्रधर शुक्ल के हाइकु शिल्प के साथ न्याय करते हैं और सौंदर्यबोध की आभा से युक्त हैं।

- डॉ. शैलेष गुप्त 'वीर

पवन कुमार जैन के हाइकु

नभ में शोर
चल रहा हो जैसे
संसद सत्र।