Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
राम शंकर वर्मा के गीत

गीत कि जिनमें भीना-भीना
हलवाहे का चुवे पसीना
ढूँढ़े जो गारे तसले में
अपना काशी और मदीना
मेड़ों पर घसियारिन जिसमें
टेर रही हो मीत
भारती!
गाऊॅं ऐसे गीत

ज्योति जैन 'ज्योति' के गीत

पैर धरातल पर ही रखना,
सुता, न देना हद उमगाय।

अनामिका सिंह के नवगीत

हमने जो
रेखाएँ खीचीं
रबर फिरा दी तुमने उन पर
फिर भी काग़ज़
अगर उठाया
तुमने लिखा रसोई , बिस्तर

रमेश गौतम के नवगीत

फिर घिनौने
क्षण हमें घेरे हुए
एक गौरेय्या गगन कैसे छुए