Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
सरोज सिंह 'सूरज' के दोहे

नीर भरे नैना रहें, लिये दरस की प्यास।
प्यासे नैना जल भरे,अजब विरोधाभास।।

 

मनोज शुक्ल 'मनुज' के मनहरण घनाक्षरी

राम-माया दोनों के ही फेर में रहे जो बंधु,
उनको न माया मिली, राम भी नहीं मिले।

नीरज 'नीरू' के पंच चामर छन्द

विदेश,देश में  बसी ,मनुष्य जाति बुद्ध हो,
अधर्म को तजें सभी,कि बैर हो न युद्ध हो।
करें कभी न कर्म यूँ, कि चित्त ही अशुद्ध हो,
बनें स्वयं सुदीप ही,कि बुद्धि भी न क्रुद्ध हो। 

सरोज सिंह 'सूरज' के पंच चामर छन्द

 
उमा रमा सरस्वती त्रिदेव शक्ति अंबिके।
गणेश कार्तिकेय मातु चंडिके प्रचंडिके।
प्रसीद सिंहवाहिनी त्रिशूल चक्र धारिणी।
प्रसीद कालिके कराल रक्तबीज नाशिनी।