Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
प्रेरणा गुप्ता की लघुकथाएँ

माँजी के करुण विलाप से सबका हृदय काँप उठा, “तेरी कही बात सच हो जाएगी बहू, सपने में भी न सोचा था। अब तो ज़िंदगी पर से मेरा भरोसा ही टूट गया।”
जैसे ही चार काँधे अर्थी को उठाने के लिए आगे बढ़े, वह चीख पड़ीं, “अरे, ये तो बताओ, कौन-से घाट लिए जा रहे हो बहू को?”

बेटे की आँखों से झर-झर आँसू बहने लगे, काँपती आवाज़ में बोला, “उसकी देह मेडिकल कॉलेज दान के लिए भेजी जा रही है, उसकी यही तो एक अंतिम इच्छा थी।”

सुजाता की लघुकथाएँ

अपने साथियों की दर्द भरी कहानी सुनकर हवा की आँखें भीग गयीं- मेरी अपनी दास्तान कुछ ऐसी ही है भाई!

सीमा सिंह की लघु कथाएँ

अपना निर्णय सुनाकर बाहर निकल कर, सामने ही खड़ी मन्नो के सिर पर हाथ फिराते हुए बोले, “अपने बाबा पर भरोसा रखना, तू उसी घर जाएगी जहाँ तेरी ज़रूरत हो। तेरे पिता के ऊँचे ओहदे, और दादा की दौलत की नहीं।”

राघव दुबे 'रघु' की लघुकथाएँ

"मेरा यह जीवन आपका दिया हुआ है, अब आप ही हमारे लिए माँ भी हो और पिताजी भी।" कहते हुए बेटा उनके कपड़े बदलने लगा था।