Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
सुनीता जैन 'रूपम' की कविताएँ

काँच की आलमारी के अंदर
तुम्हारी तस्वीर लगा कर
नहीं बनाना चाहती तुमको
प्रदर्शन की वस्तु।
तुम तो आज भी प्रतिष्ठित हो
मेरे हृदय पटल पर,

हरिंदर राणावत की कविताएँ

तुम्हारे प्यार ने मुझे बहुत-सी चीज़ों के मतलब समझाए हैं

अर्चना उपाध्याय की कविताएँ

सहेज लेना चाहती हूँ
सभी यादों के पहाड़

शायद उन्हें छूकर लौट सकें
ज़िंदगी की सारी प्रतिध्वनियाँ

डॉ० ज्योत्सना मिश्रा की कविताएँ

उस अंतिम वर्षा के
उस भीगे पल में
एक बूँद थी मैं !
तुम्हारी हथेलियों की गुनगुनी
ताल में गीत सी बहकती
अब पतझड़ की पीत गंध हूँ
बिखरी दूर तक
दिशायें मुग्ध हैं मेरे
वैराग्य पर!