Ira Web Patrika
अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
डॉ० प्रभा दीक्षित की कविताएँ

तुम्हारी सभ्यता का चरम ऐश्वर्य
समाहित है भाषा में
तुम्हारी संस्कृति के
स्याह हिंसक पशु भी
विचरते हैं भाषा के जंगल में
इसी से तुम्हारी सभ्यता की
सबसे निचली सीढ़ी पर बैठी है औरतें
गालियों की पोशाक पहने
एक विद्रूप मुस्कान सजाए

चंद्रेश्वर की कविताएँ

परिपक्व होते ही
रंग प्यार का
दिखता ख़ूब गाढ़ा
पके सिंदूरी आम की तरह

यही समय होता पर
उसके बिछुड़ने का भी
डार से।

सुनीता जैन 'रूपम' की कविताएँ

काँच की आलमारी के अंदर
तुम्हारी तस्वीर लगा कर
नहीं बनाना चाहती तुमको
प्रदर्शन की वस्तु।
तुम तो आज भी प्रतिष्ठित हो
मेरे हृदय पटल पर,

हरिंदर राणावत की कविताएँ

तुम्हारे प्यार ने मुझे बहुत-सी चीज़ों के मतलब समझाए हैं