Ira Web Patrika
अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
जयप्रकाश मानस की कविताएँ

सीपी, शंख, घोंघे, मोती-
तट पर बिखरे, जैसे कोई
पुरानी डाक का बस्ता खुल गया।

रवि कुमार जैन की कविताएँ

 
नौकाएँ
किनारे लग गई हैं
 
विमान
हवाई अड्डे पर
उतर आए हैं
 
सैनिक
सादे कपड़े
पहन चुके हैं
 
कहा जा सकता है—
युद्ध ख़त्म हो गया है
 

डॉ० निर्मल कुमार सैनी की कविताएँ

दस टीन तेल  
पाँच चीनी के कट्टे 
चार बोरी गेंहूँ
से लदा हुआ गाड़ी
में जुता हुआ 
मैं गधा हूँ 

विजय राही की कविताएँ

तुम्हारे चले जाने पर भी
तुम्हारी याद की ही तरह
यह तपेगी
जलेगी
ढह पड़ेगी