Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
केशव शरण की कविताएँ

प्यार महान है
यह सबमें एक समान है
पीर महान है
यह सबकी एक समान है

अन्यथा कहाँ
मैं और तू
और कहाँ वे!
देवी व देव!!

सपना चन्द्रा की कविताएँ

कभी-कभार यादें आकर
खटखटाती हैं द्वार मन के
टोहती हैं पेशानी पर एकाध बूँद
बेचैनी भरे लम्हों की

डॉ० प्रभा दीक्षित की कविताएँ

तुम्हारी सभ्यता का चरम ऐश्वर्य
समाहित है भाषा में
तुम्हारी संस्कृति के
स्याह हिंसक पशु भी
विचरते हैं भाषा के जंगल में
इसी से तुम्हारी सभ्यता की
सबसे निचली सीढ़ी पर बैठी है औरतें
गालियों की पोशाक पहने
एक विद्रूप मुस्कान सजाए

चंद्रेश्वर की कविताएँ

परिपक्व होते ही
रंग प्यार का
दिखता ख़ूब गाढ़ा
पके सिंदूरी आम की तरह

यही समय होता पर
उसके बिछुड़ने का भी
डार से।