Ira Web Patrika
अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
दयाराम वर्मा की कविताएँ

देशप्रेम से ओतप्रोत
दुश्मन को ललकारते
ओजस्वी शब्द
स्वर लहरियों पर हुलसित
राग-रागिनी हैं शब्द
सप्त स्वरों का गुंजन भी
मधुर मिलन लय-स्वर शब्द

शैलेन्द्र चौहान की कविताएँ

असल में मैं कहीं नहीं हूँ
मेरे पास पैसे नहीं हैं
मै ग्रेजुएट हूँ घर पर बैठा हूँ
सपने हैं और सपने भी वैसे ही
जैसे टीवी सीरियल, सोशल मीडिया से

केशव शरण की कविताएँ

प्यार महान है
यह सबमें एक समान है
पीर महान है
यह सबकी एक समान है

अन्यथा कहाँ
मैं और तू
और कहाँ वे!
देवी व देव!!

सपना चन्द्रा की कविताएँ

कभी-कभार यादें आकर
खटखटाती हैं द्वार मन के
टोहती हैं पेशानी पर एकाध बूँद
बेचैनी भरे लम्हों की