Ira Web Patrika
अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
प्रतिभा सुमन शर्मा की दो कविताएँ

कई बार मैं पत्थर हूँ और हूँ बेजान
यह सोचकर कइयों ने किया उपहास
कितनों ने तो उखाड़ फेंकने का यत्न किया
पर स्तंभ हूँ मैं
जड़ें बेहद रुंझी है मेरी

लता अग्रवाल 'तुलजा' की कविताएँ

साहित्य
आज चेतन मन का भाव नहीं
महज चमत्कृत शब्दों की
बुनावट बन कर रह गया है

उमेश स्वामी 'यायावर' की कविताएँ

गर्मियों की धूप
सर्दियों की ठंड से लड़ते-लड़ते
वह पेड़ मुस्कुराता है
घने कोहरे में तुम्हारे लिए

सरिता भारत की कविताएँ

करतब करती लड़की
अपनी मिट्टी के गढ़े गए वजूद को लिए
पीठ पर गठरिया बाँधे
इस पार से उस पार
आज भी झूल रही
रस्सी पर