Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
ललन चतुर्वेदी की कविताएँ

दुःख कुआँ है
माँ कहती थी बड़ी विलक्षण बात-
एक कुएँ से भर जाते हैं सात कुएँ
सात कुएँ भर नहीं सकते एक कुआँ

जयप्रकाश मानस की कविताएँ

सीपी, शंख, घोंघे, मोती-
तट पर बिखरे, जैसे कोई
पुरानी डाक का बस्ता खुल गया।

रवि कुमार जैन की कविताएँ

 
नौकाएँ
किनारे लग गई हैं
 
विमान
हवाई अड्डे पर
उतर आए हैं
 
सैनिक
सादे कपड़े
पहन चुके हैं
 
कहा जा सकता है—
युद्ध ख़त्म हो गया है
 

डॉ० निर्मल कुमार सैनी की कविताएँ

दस टीन तेल  
पाँच चीनी के कट्टे 
चार बोरी गेंहूँ
से लदा हुआ गाड़ी
में जुता हुआ 
मैं गधा हूँ