Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
चंद्रेश्वर की कविताएँ

क्या अब लोग जानेंगे
नदियों के नाम
रेलगाड़ियों के नामों से
क्या सचमुच की नदियाँ
बदल जायेंगी
रेतीले मैदानों में

सुमन सिंह चंदेल की कविताएँ

रामायण के बीच रखा जाना सुहाएगा उन्हें
जब कोई लगाएगा माथे से
तो मिलेगा एक स्नेहिल स्पर्श भी

जीनस कँवर की कविताएँ

अब वो मुझे प्रेम कहकर
सम्बोधित नहीं करता है
अब पेड़ कहता है
मुझे मेरा चाहने वाला

गोलेंद्र पटेल की कविताएँ

मुझे कुएँ और धुएँ के बीच सिर्फ़ धूल समझा जाता है
पर मैं बेहया का फूल हूँ
देवी-देवता मुझे हालात का मारा और वक्त का हारा कहते हैं
मैं दक्खिन टोले का आदमी हूँ