Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
संदीप तोमर की कविताएंँ

मैं खिड़की से देखता हूँ
अपने पिता को
वह पिता, जिसने
अपना पसीना बहा
सींचा है मुझे
और बनाया है
एक कमज़ोर पौधे से
मज़बूत विशाल दरख़्त,

संध्या सिंह की कविताएँ

बड़ा दुर्गम और सँकरा है
स्त्री के मुस्कुराते होंठ
और पनीली आँखों के
बीच का रास्ता

पंकज चतुर्वेदी की कविताएँ

मेरा साथ इसलिए मत देना
कि मैं तुम्हारा सजातीय हूँ
या मित्र हूँ
या इस प्रत्याशा में
कि मैं भी तुम्हारा साथ दूँगा
व्यक्ति का साथ मत देना

सत्या शर्मा 'कीर्ति' की कविताएँ

पर बार-बार सज़ा के बाद भी
हम संभलते नहीं
क्योंकि मनुष्य को
भगवान बन जाने का अहंकार
उसे मनुष्य भी कहाँ रहने देता है