Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
अनीता अनुश्री की कविताएँ

आँखों के रस्ते दिल तक
पहुँचने के बाद
बह निकलती है
आँखों से ही
तुम्हारी तस्वीर

चित्रा देसाई की कविताएँ

कहानी के
अनचाहे पात्र,
जो नुकीले शब्द बन
शिराओं में बहते हैं
उन्हें थोड़ा-सा
मख़मली कर दूँ

डॉ० अमिता दुबे की कविताएँ

कभी ऐसा होता है
जो आँखें देखती हैं
जो कान सुनते हैं
वह सच नहीं होता
सच होता है वह
जो हमारे आस-पास नहीं होता