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नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

रवि कुमार जैन की कविताएँ

रवि कुमार जैन की कविताएँ

 
नौकाएँ
किनारे लग गई हैं
 
विमान
हवाई अड्डे पर
उतर आए हैं
 
सैनिक
सादे कपड़े
पहन चुके हैं
 
कहा जा सकता है—
युद्ध ख़त्म हो गया है
 

गिलहरियों को सड़क पार करना नहीं आता
 
गिलहरियों को
सड़क पार करना
नहीं आता
 
करोड़ों वर्षों के
विकास के बाद भी
नहीं आता
 
आदमियों को
सड़क पार करना
नहीं आता
 
वरना नहीं
पिचकाता टायरों से
गिलहरियाँ
 
पहाड़ों को भी
सड़क पार करना
नहीं आता
 
वरना नहीं
पिचकाता 
आदमियों को
 
लगता है
किसी को भी
सड़क पार करना
नहीं आता
 
**********
 
 
वह निगाह
 
प्रेम
एक दृष्टि है
जिसके पड़ते ही
हर वस्तु
प्रेममय हो जाती है
 
वह दृष्टि
फूलों को
मिली है
 
वह दृष्टि
तितलियों को
मिली है
 
वह दृष्टि
पेड़-पौधों को
मिली है
 
बहुत से
जानवरों को भी
मिली है
 
परंतु
इंसानों को
शायद ही मिली हो
 
यदि मिली भी
तो गिनती के
कुछ चेहरों को
 
उसकी दृष्टि
मुझे
प्रेममय कर देती है
 
यह सिद्ध करता है—
वह दृष्टि
उसे मिल चुकी है
 
मुझे
यह सौभाग्य मिला
कि किसी ने
मुझे देखा
और मैं
प्रेम से भर गया
 
पर
मेरी दृष्टि
अब भी
अभागी है
 
**********
 
 
तलाश
 
लकड़हारा
छाँव तलाश रहा है
 
शहर में रहने वाला
गाँव तलाश रहा है
 
बुज़ुर्ग माँ को
वृद्धाश्रम भेजने के बाद
घर में तलाश रहा है
 
और भी हैं
ऐसी बहुत-सी तलाशें
 
ये सब
उतनी ख़तरनाक नहीं हैं
 
जितना—
मौत को तलाशना
 
**********
 
 
आसमान ग़ायब था
 
खिड़की वहीं थी
निगाह भी—
पर
आसमान ग़ायब था
 
कोई कारख़ाना
उग आया था
जो मेरा
आसमान खा गया
 
नकुए वही थे
फेफड़े भी—
पर
बयार नहीं थी
 
वही कारख़ाना
बयार भी खा गया
 
बहुत कुछ
ग़ायब हो चुका था
हर बार
उत्तर—
कारख़ाना था
 
एक दिन
मैं भी
ग़ायब हो गया
और
कारख़ाने में
मज़दूर
नज़र आया
 
**********
 
 
सब ठीक है
 
नौकाएँ
किनारे लग गई हैं
 
विमान
हवाई अड्डे पर
उतर आए हैं
 
सैनिक
सादे कपड़े
पहन चुके हैं
 
कहा जा सकता है—
युद्ध ख़त्म हो गया है
 
कहा नहीं जा सकता—
फिर भी
कहा जाना चाहिए
 
दिमाग़ को
ऐसी बातों से
सुरक्षित लगने लगता है
 
मैं तो कहता हूँ—
मीडिया को
यही कहना चाहिए
हर रोज़
 
ताकि
हर किसी को मिल सके
नींद
और सुकून
जो सबसे महंगी चीज़ें हैं
अब
 
**********
 
 
वे सौन्दर्य देखते हैं
 
वे सौन्दर्य देखते हैं  
मरे हुए डोडो पंछी में  
 
शेर—  
जिसको मारा गया  
उसे  
दीवार पर टाँगते हैं  
 
इसमें उन्हें  
सौन्दर्य दिखता है  
 
अजब है  
पर—  
संभव है कि  
उनकी चेतना  
हमसे  
आगे निकल गई हो  
 
इसलिए  
हम—  
घर सजाते हैं  
फूलों से  
 
वे—  
मरे हुए पंछियों  
और जानवरों से  
 
डर की बात  
तो यह है कि  
उन्हें सौन्दर्य  
सिर्फ़ मृत्यु में  
ही दिखता है  
 
और शायद—  
इसीलिए  
वे दुनिया को  
मरते हुए  
देखना चाहते हैं
 
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वसंत जमशेदपुरी

23 September 2025

मन को स्पर्श करती कविताएँ

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रचनाकार परिचय

रवि कुमार जैन

ईमेल : ravikumarjain@gmail.com

निवास : इंदौर (मध्य प्रदेश)

जन्मतिथि- 25 अगस्त,1977
जन्मस्थान- ललितपुर (उ॰प्र॰)
शिक्षा- पीएच.डी.
संप्रति- वैज्ञानिक अधिकारी, राजा रामन्ना प्रगत प्रौद्योगिकी केंद्र,
परमाणु ऊर्जा विभाग, इंदौर (म॰प्र॰)
प्रकाशन- दस्तक (ग़ज़ल संग्रह – प्रकाशनाधीन)
सम्पर्क- सी-9/1, केट कॉलोनी, इंदौर (म०प्र०)
मोबाइल- 9406630247