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नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

के० पी० अनमोल के दोहे

के० पी० अनमोल के दोहे

दिल से दिल की बात का, कैसे हो इज़हार।
भाव हज़ारों हैं मगर, शब्द नहीं हैं चार।।

अच्छी हर अवधारणा, कर डाली है भंग।
सीख लिए संसार ने, जाने कैसे ढंग।।

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हमने इसकी बात की, या की उसकी बात।
देखे ख़ुद को छोड़कर, सबके ही हालात।।

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कभी पवन की पीठ पर, कभी शिखर के साथ।
कैसे हम पकड़ा करें, इच्छाओं के हाथ।।

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भीतर भी इक जंग हैं, बाहर भी है जंग।
और नहीं आते मुझे, लड़ने वाले ढंग।।

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मन की सारी गुत्थियाँ, एक-एक कर खोल।
हो जाएगी ज़िंदगी, ख़ुद ही तब अनमोल।।

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जब-तब इसके ही लिए, युद्ध हुए अनमोल।
नक़्शा रोटी का मगर, रहा हमेशा गोल।।

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तन की सुंदरता जगत, करता है स्वीकार।
मन की सुंदरता लिये, बैठा मैं मन मार।।

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पल में खुलते हैं कई, उम्मीदों के द्वार।
माने भी तो किस तरह, यह मन माने हार।।

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बच्चे को जब लग गयी, दुनिया की कुछ आँच।
चुटकी में करने लगा, दो और दो को पाँच।।

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लेकर जाएगा नहीं, कोई सुख की ओर।
तुमको ख़ुद है ढूँढना, दुख का अंतिम छोर।।

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सीधे-सादे पेड़ को, बे-मतलब झकझोर।
करती रहती है हवा, खाली-पीली शोर।।

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होगी जिस इंसान की, जितनी टेढ़ी चाल।
उतना वो इस दौर में, होगा मालामाल।।

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दिल से दिल की बात का, कैसे हो इज़हार।
भाव हज़ारों हैं मगर, शब्द नहीं हैं चार।।

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कहीं समुंदर प्रेम का, कभी घृणा का कूप।
अलग-अलग सबके लिए, है जीवन का रूप।।

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चाहूँ तो चलता रहूँ, दुनिया के अनुसार।
पर ढोऊँ मैं किसलिए, उम्मीदों का भार।।

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बारिश बारिश ही नहीं, है कुदरत का प्यार।
सावन में तुम देखना, पेड़ों का आकार।।

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रखवालों की सोच में, आयी जबसे खोट।
तबसे पर्वत झेलते, रोज़ नए विस्फोट।।

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गाएँ छाया खोजतीं, पंछी ढूँढे नीड़।
हम अपने में मस्त हैं, कब समझेंगे पीड़।।

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सोच रहा हूँ देखकर, मैं नदियों का हाल।
क्या भीतर से हम सभी, इतने हैं कंगाल।।

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अलग-अलग सबकी महक, जुदा-जुदा हैं रंग।
पर बगिया के फूल सब, रहते मिलकर संग।।

7 Total Review

के० पी० अनमोल

16 July 2025

उत्साहवर्धन के लिए आप सभी गुणीजनों का हार्दिक आभार

गोविन्द सेन

14 July 2025

सीधे-सादे पेड़ को, बे-मतलब झकझोर। करती रहती है हवा, खाली-पीली शोर।। सभी दोहे धारदार हैं। बधाई।

मुनव्वर अली 'ताज'

12 July 2025

पढ़ते ही ऐसा लगा दोहे हैं अनमोल

वसंत जमशेदपुरी

11 July 2025

मन की गाँठे खोलते सुंदर दोहे

M

Mamta kiran

11 July 2025

दोहे पढ़े अभी अनमोल जी बहुत ज़िंदगी के तमाम रंग दोहों में... बहुत बधाई 💐 💐

S

Sanjay

11 July 2025

Sundar dohe sabhi👌👍

कैलाश बाजपेयी

11 July 2025

आपको दोहों में भी ग़ज़लों के शेरों जैसी रवानगी है। बहुत-बहुत बधाई

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रचनाकार परिचय

के० पी० अनमोल

ईमेल : kpanmol.rke15@gmail.com

निवास : रुड़की (उत्तराखण्ड)

जन्मतिथि- 19 सितम्बर
जन्मस्थान- साँचोर (राजस्थान)
शिक्षा- एम० ए० एवं यू०जी०सी० नेट (हिन्दी), डिप्लोमा इन वेब डिजाइनिंग
लेखन विधाएँ- ग़ज़ल, दोहा, गीत, कविता, समीक्षा एवं आलेख।
प्रकाशन- ग़ज़ल संग्रह 'इक उम्र मुकम्मल' (2013), 'कुछ निशान काग़ज़ पर' (2019), 'जी भर बतियाने के बाद' (2022) एवं 'जैसे बहुत क़रीब' (2023) प्रकाशित।
ज्ञानप्रकाश विवेक (हिन्दी ग़ज़ल की नई चेतना), अनिरुद्ध सिन्हा (हिन्दी ग़ज़ल के युवा चेहरे), हरेराम समीप (हिन्दी ग़ज़लकार: एक अध्ययन (भाग-3), हिन्दी ग़ज़ल की पहचान एवं हिन्दी ग़ज़ल की परम्परा), डॉ० भावना (कसौटियों पर कृतियाँ), डॉ० नितिन सेठी एवं राकेश कुमार आदि द्वारा ग़ज़ल-लेखन पर आलोचनात्मक लेख। अनेक शोध आलेखों में शेर उद्धृत।
ग़ज़ल पंच शतक, ग़ज़ल त्रयोदश, यह समय कुछ खल रहा है, इक्कीसवीं सदी की ग़ज़लें, 21वीं सदी के 21वें साल की बेह्तरीन ग़ज़लें, हिन्दी ग़ज़ल के इम्कान, 2020 की प्रतिनिधि ग़ज़लें, ग़ज़ल के फ़लक पर, नूर-ए-ग़ज़ल, दोहे के सौ रंग, ओ पिता, प्रेम तुम रहना, पश्चिमी राजस्थान की काव्यधारा आदि महत्वपूर्ण समवेत संकलनों में रचनाएँ प्रकाशित।
कविता कोश, अनहद कोलकाता, समकालीन परिदृश्य, अनुभूति, आँच, हस्ताक्षर आदि ऑनलाइन साहित्यिक उपक्रमों पर रचनाएँ प्रकाशित।
चाँद अब हरा हो गया है (प्रेम कविता संग्रह) तथा इक उम्र मुकम्मल (ग़ज़ल संग्रह) एंड्राइड एप के रूप में गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध।
संपादन-
1. ‘हस्ताक्षर’ वेब पत्रिका के मार्च 2015 से फरवरी 2021 तक 68 अंकों का संपादन।
2. 'साहित्य रागिनी' वेब पत्रिका के 17 अंकों का संपादन।
3. त्रैमासिक पत्रिका ‘शब्द-सरिता’ (अलीगढ, उ.प्र.) के 3 अंकों का संपादन।
4. 'शैलसूत्र' त्रैमासिक पत्रिका के ग़ज़ल विशेषांक का संपादन।
5. ‘101 महिला ग़ज़लकार’, ‘समकालीन ग़ज़लकारों की बेह्तरीन ग़ज़लें’, 'ज़हीर क़ुरैशी की उर्दू ग़ज़लें', 'मीठी-सी तल्ख़ियाँ' (भाग-2 व 3), 'ख़्वाबों के रंग’ आदि पुस्तकों का संपादन।
6. 'समकालीन हिंदुस्तानी ग़ज़ल' एवं 'दोहों का दीवान' एंड्राइड एप का संपादन।
प्रसारण- दूरदर्शन राजस्थान तथा आकाशवाणी जोधपुर एवं बाड़मेर पर ग़ज़लों का प्रसारण।
मोबाइल- 8006623499