Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
पूजा अग्निहोत्री की लघुकथाएँ

 
नवल और नीता का प्रेम विवाह था। लेकिन जबसे उनके जीवन में नन्ही परी ने दस्तक दी उनके परिवार में तो खुशियाँ बढ़ी लेकिन उन दोनो में दूरियाँ बढ़ती जा रही थी।
कारण भी समझ में नही आ रहा था।

डॉ० नीरज शर्मा 'सुधांशु' की लघुकथाएँ

गलियारे में कई मोड़ों से गुज़रते हुए आखिर वह कोठरिया आ ही गई जहाँ एक बूढ़ी महिला, बीच से ढीले, नीचे लटके बान के झिंगोले में धँसी खाँस रही थी।
डॉक्टर सुमित को देखते ही उसकी ललाई आँखों में उम्मीद की किरण जगमगाई। लगातार खाँसने से ज़बान अटक गई थी। मूक याचना करते कँपकँपाते उसके हाथ जुड़ गए थे।

संध्या तिवारी की लघुकथाएँ

मुझे  फैक्ट्री के सारे मुलाजिम हमेशा ही फैक्ट्री में बजने बाले हूटर के गुलाम सरीखे दिखते थे। हालांकि ये सब नियम से नहाते-धोते ,खाते-पीते थे, लेकिन इनके जीवन में स्फूर्ति न थी। एक यन्त्रवत जीवन यापन था। एक अनकही यन्त्रणा थी।

सुधीर द्विवेदी की लघुकथाएँ

"तुम्हे दकियानूसी लोगों की बातों को सीरियसली नहीं लेना चाहिए। " समझाते हुए पत्नी ने फौरन पति के हाथों से चाक़ू छुड़ाया और मुस्कुरा कर उसके हाथों में चाय का कप थमा दिया।