Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’ की लघुकथाएँ

प्रधानजी कन्या पाठशाला के लिए चंदा इकट्ठा करने निकले तो पारो के घर की हालत देखकर पिघल गए–"क्यों दादी, तुम हाँ कह दो तो तुम्हें बुढ़ापा-पेंशन दिलवाने की कोशिश करूँ?"

योगराज प्रभाकर की लघुकथाएँ

दरवाज़ा एकदम खुल गया है, वे दोनों बाहर आ गए हैं और मुझसे थोड़ी ही दूर खड़े हैं। मुझे लगा कि दोनों मुझे अजीब-सी नज़र से देख रहे हैं मैं सकपका-सा गया हूँ, कहीं इन्होने मेरी चोरी तो नहीं पकड़ ली है...