Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
डॉ० लता अग्रवाल 'तुलजा' की लघुकथाएँ

इंस्पेक्टर ने हवलदार को इशारा किया। पास ही खड़ी कार से सूट-बूट पहने एक साहब अपनी मेम साहब के साथ कार से उतरे, उनकी गोद में चार साल का मँहगा सूट, बूट पहने एक गोलमटोल बच्चा था।

शराफ़त अली ख़ान की तीन लघुकथाएँ

बुढ़ापा क्या इतना दयनीय भी हो सकता है? वह सोचने लगा। उसने बिस्तर पर से उठने का असफल प्रयास किया। किंतु उठने की उसकी सारी शक्ति व्यर्थ गई। वह कमर तक उठा, फिर लेट गया। ये बुढ़ापा भी क्या कमीनी चीज है? वह ये सोचकर इस कठिन समय में भी मुस्कुरा पड़ा। वह लेटे-लेटे सोचने लगा। वक़्त ही दुनिया में सब कुछ है। एक वक़्त वह था, जब ट्रेनिंग के दौरान वह पच्चीस किलोमीटर की तेज चाल से चलकर वन विभाग के फिजिकल टेस्ट में पास हुआ था।

संदीप तोमर की लघुकथाएँ

बची हुई सिगरेट में सुट्टा खींच वह गैस को मंदा कर दूसरे कमरे की ओर बढ़ा। मोबाइल स्पीकर पर स्वर उभरा,“दीपक! जानते हो मैं हमेशा ऐसे प्रेमी की कामना करती थी जो सिगरेट, शराब, माँस-मछ्ली सबसे दूर हो, तुम कितने अच्छे हो, जो आज के जमाने में इन सबसे दूर हो।”

प्रेरणा गुप्ता की लघुकथाएँ

“फूल-पत्ते, हवा, बादल और नदियाँ वगैरह तो प्रकृति के नियमों से बँधकर बिना किसी शर्त के हर किसी से प्रेम करने को बाध्य हैं; लेकिन इंसान, बौद्धिक स्तर ऊँचा होते हुए भी वह इच्छाओं के वशीभूत, प्रेम का व्यापार करने में लग पड़ा है।” विक्रम ने कहा।