Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
तबस्सुम जहां की लघुकथाएँ

सोचते ही लक्ष्मी की आँखों में ठेकेदार के लिए घृणा उतर आई। पर उसे संतोष था। बच्चों और अपाहिज पति के पेट भरने का संतोष।

सीमा सिंह की लघुकथाएँ

चाय की ट्रे हाथ में लिए आती उपासना ने अपने सास-ससुर की बातचीत अनजाने में सुन ली थी। “माँ, आपको मेरा इस घर में रहना अधिक कष्ट देता है या मेरे कपड़े?”

डॉ० चंद्रेश कुमार छतलानी की लघुकथाएँ

“फिर से स्वागत है. अब देखिए प्रदर्शनकारी महिलाओं में से कईयों ने हाथ में तख्ती पकड़ी हुई हैं, इन पर लिखा है ‘सेव लाइव्स‘, ‘नो रेप - नो मर्डर‘, ‘स्टॉप वोईलेंस‘...

आइये इनसे कुछ प्रश्न करते हैं.

डॉ० सुषमा गुप्ता की लघुकथाएँ

उसने एक कागज़ पर जितने अक्षर सीखे थे, सब लिख दिए और अपने आँगन से उसके आँगन में फेंक दिया, फिर अपने गेट से निकलकर तेज़ी से उसके घर की तरफ़ गई। उसके आँगन में पड़ी अपनी चिट्ठी को देख, खुशी से चहकती हुई, उसके घर के अंदर गई।