Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
राघव दुबे 'रघु' की लघुकथाएँ

"मेरा यह जीवन आपका दिया हुआ है, अब आप ही हमारे लिए माँ भी हो और पिताजी भी।" कहते हुए बेटा उनके कपड़े बदलने लगा था।

सविता मिश्रा 'अक्षजा' की लघुकथाएँ

"कल तक ख़ुश होती थी मैं रिश्तेदार निर्मला की किस्मत पर परन्तु आज रूबी की क़ामयाबी को देखकर मुझे उनसे इर्ष्या हो रही है। तनिक तेरे आगे-पीछे की ही तो है उसकी भी पैदाइश, ऊपर से ऐसी! देख, फिर भी वह मेहनत से पढ़कर कलेक्टर बन गयी और तू!"

विनय विक्रम सिंह की लघुकथाएँ

आज चूल्हे ने पाँच पनेथी ही दी थीं।  चूड़ियों ने दो पनेथी बड़ी थाली में डाल दीं, और एक-एक तीनों छोटी थालियों में। 

मनोज कर्ण की लघुकथाएँ

डगमगाती हुई नाव में भी कुल सोलह लोग सवार हो गए, क्षमता से दो गुना।
उफनती हुई नदी मे नाव के उतरते ही नाव सवार को केवल दो ही चीज दिखाई दे रही थी,सामने मौत और उस के पार बारात घर।