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फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

डॉ० सुरेश कुमार शुक्ल के घनाक्षरी छन्द

डॉ० सुरेश कुमार शुक्ल के घनाक्षरी छन्द

भक्ति सूत्र मे पिरोये छन्द छन्द मोतियों से 
प्रेम की सुगन्ध दिव्य आपको रिझायेगी। 
यति-गति-लय को सम्हाल तो न पाया नाथ!
मति की विफलता ज़रूर आड़े आयेगी। 

 हर हर महादेव(घनाक्षरी)
 
आपसा न दानी वरदानी सुरमण्डल में
और कहाँ व्यर्थ मैं बलाप करता रहूँ ?
महामन्त्र ज्ञान का जगाओ मन मन्दिर में 
श्वास प्रति श्वास नित्य जाप करता रहूँ । 
अविरल भक्ति रस पान कर पाऊँ नाथ! 
प्रेम रस घन मैं अमाप करता रहूँ । 
नाम की अमोध शक्ति करिये प्रदान आप
दूर पाप ताप का प्रताप करता रहू ।

आपने बनाया व्योम आपने बनायी धरा
जीवन के दीप आपने ही तो जलाये हैं।
आपने बनाये भक्त भक्ति उपजायी और
भगवन्त रूप में सदैव आप आये हैं। 
सृष्टि मे न आपसे विलग कुछ भी है नाथ।
सृष्टा सृष्टि दोनों आप, आप में समाये है।
जीवन का रिक्त पात्र याचना के शब्द लिये
द्वार पर आये निज शीश को झुकाये हैं।
 
सत्य सत्य कहते असत्य के सिपाही क्रूर
सत्य को असत्य में बहाते चले जाते हैं।
होकर प्रसन्न झूठ कण्ठ से लगाते और 
झूठ के सहर्ष गीत गाते चले जाते हैं।
आचरण स्वयं विपरीत करते हैं नित्य
दोष कलिकाल को लगाते चले जाते हैं। 
आशुतोष ! सत्य के प्रदीप राह देखते हैं
भाव मिज मन के दबाते चले जाते हैं।
 
पतवार से विहीन हुई भवसिन्धु मध्य 
नाव मझधार में है पार कर दीजिए। 
जाने अनजाने शत्रुघात हैं लगाये हुए
शूलपाणि शूल से प्रहार कर दीजिए।
काम, क्रोध, लोभ हैं उठाते सिर बार बार 
एक बार सबका संहार कर दीजिए। 
शीश पर ऋण हैं लदे हुए अनेक नाथ
धीरे धीरे दूर सब भार कर दीजिए । 
                  
भक्ति सूत्र में पिरोये छन्द छन्द मोतियों से 
प्रेम की सुगन्ध दिव्य आपको रिझायेगी। 
यति-गति-लय को सम्हाल तो न पाया नाथ!
मति की विफलता ज़रूर आड़े आयेगी। 
शब्द शिल्प का न ज्ञान ध्यान रख पाया ठीक 
भाव की पुकार आप, आप तक जायेगी।
दौडी दौड़ी चली आयेगी कृपा की गन्ध और,
मेरे मन बाग को सहज महकायेगी। 


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रचनाकार परिचय

सुरेश कुमार शुक्ल 'संदेश'

ईमेल : sureshkumarshuklasandesh@gmail.com

निवास : गोला गोकर्णनाथ, लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश)

जन्मतिथि- 05 फरवरी, 1972
जन्मस्थान- गोला गोकर्णनाथ, लखीमपुर खीरी
शिक्षा- एम० ए० (हिन्दी)
संप्रति- स्वतंत्र लेखन
प्रकाशन- कई महाकाव्यों, खंडकाव्यों सहित 29 से अधिक पुस्तकों का प्रकाशन।
सम्मान- उत्तरप्रदेश हिंदी संस्थान, भाऊराव देवरस न्यास सहित अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित।
निवास- लखीमपुर खीरी (उत्तरप्रदेश)