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वसंत जमशेदपुरी के दोहे

वसंत जमशेदपुरी के दोहे

हिन्दी की छान्दस कविता में ऋतू तथा त्योहारों के वर्णन की अपनी परंपरा रही है। दोहा विधा का भी इस परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वसन्त की आहट के साथ ही जहाँ मौसम ने करवट ले ली है और सबकुछ फिर से जीवंत होने लगा है, ऐसे में इस ऋतू और उससे जुड़ी अनुभूतियों को वसंत जमशेदपुरी जी ने अपने दोहों के माध्यम से शब्दबद्ध किया है। इनके ये दोहे हमारे सामने इस ऋतू के अलग-अलग चित्र प्रस्तुत करते हैं।

- के० पी० अनमोल

कोयल ने मधुमास में, छेड़ा ऐसा राग।
वैरागी को भी लगा, जागे उसके भाग।।

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स्वागत करें वसंत का, ले मधुमय उल्लास।
जाते-जाते दे गया, शिशिर हमें मधुमास।।

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बिखरा केसर देखकर, रीझ गये हैं कंत।
मनभावन ऋतु आ गई, चहका मदन वसंत।।

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पीली सरसों ने कहा, टेसू से सोल्लास।
गीत रचें मिल प्रीति के, आया है मधुमास।।

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आम्र-कुंज में कूजते, कोयलिया के बैन।
विरह-ताप बढ़ने लगा, बोझिल अब दिन-रैन।।

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आम्र-बौर की गंध से, महक उठा गुलजार।
असहनीय अब हो गई, कुसुमायुध की मार।।

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पंचम स्वर में कोकिला, भरे मधुर आलाप।
फिर कैसे बढ़ता नहीं, विरहिन का संताप।।

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पाती लेकर आ गया, वासंती मधुमास।
सज-धज कर गोरी खड़ी, पिया मिलन की आस।।

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कोयलिया ने मस्त हो, गाया ऐसा फाग।
भ्रमरों ने टोली बना, लूटा खूब पराग।।

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पतझर ही आता सदा, लेकर सुखद वसंत।
सार समझ संसार का, दुख का होगा अंत।।

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रचनाकार परिचय

वसंत जमशेदपुरी

ईमेल : mavasant1960@gmail.com

निवास : जमशेदपुर (झारखण्ड)

मूल नाम- मामचंद अग्रवाल
जन्मतिथि- 08 दिसंबर, 1957
जन्मस्थान- जमशेदपुर (झारखण्ड)
शिक्षा- आई० कॉम
लेखन विधाएँ- हिंदी, राजस्थानी एवं भोजपुरी में दोहा, मुक्तक, गीत, ग़ज़ल, मुक्त छंद, लघुकथा आदि
प्रकाशन- अँजुरी भर गीत (गीत संकलन), ससुराला (ससुराल पर मुक्तक), महकती हुई रात होगी (हिंदी ग़ज़ल संग्रह), मुट्ठी भर वातास (दोहा सतसई) प्रकाशित।
बाल-बाँसुरी, बिहार के बाल साहित्यकार, इंद्रधनुष, दोहा दर्शन, सुकवि पच्चीसी, त्रिवेणी, सूली ऊपर सेज, साक्षात्कार, आइने के सामने, सत्यम काव्य मेखला, काव्य गुंजना, अभिनव कुंडलिया, 55 हिन्दुस्तानी ग़ज़लें, लघुकथा शतक, करो रक्त का दान, हिंदी ग़ज़ल के साक्षी, कुण्डलिया शतक, आचमन, सँवरता बचपन आदि साझा प्रकाशनों में रचनाएँ प्रकाशित।
इनके अलावा देशभर की प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित।
संपादन- आह्वान, जय भारती, कुरजाँ, राजस्थान नवयुक संघ- मानगो की रजत जयंती एवं स्वर्ण जयंती स्मारिका
सम्मान- काव्य शास्त्री, कविवर बच्चन पाठक सलिल सम्मान, दोहा रत्न, मुक्तक शिरोमणि, मुक्तक समस्या-पूर्ति सम्मान, काव्य दिग्गज, दोहा सम्राट, रचनाकार सम्मान, गीत श्री, श्री साहित्य गौरव सम्मान, कलम की सुगंध- झारखंड गौरव सम्मान, रंग श्री सम्मान, भाई जी हनुमान प्रसाद पोद्दार सम्मान, सृजन साहित्य सम्मान, उषा देवी मरुधर साहित्य सम्मान, हिंदी साहित्य शिरोमणि आदि सम्मानों से विभूषित।
सहयोग प्रकाशन द्वारा आयोजित 'आओ बचपन सँवारें' बाल कविता लेखन में गीत 'आओ बच्चो भरें सिकोरा' को द्वितीय पुरस्कार।
संपर्क- सीमा वस्त्रालय, राजा मार्केट, डिमना रोड, मानगो बाज़ार, जमशेदपुर- 831012
मोबाइल- 9334805484