Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
पुष्पेंद्र 'पुष्प' की ग़ज़लें

 
ख़्वाब किसी के अक्सर आँखों के रस्ते
नींद  उड़ा  ले  जाते  हैं  तन्हाई में

डॉ० कृष्ण कुमार 'नाज़' की ग़ज़लें

ज़िंदाबाद मोहब्बत, तेरे दीवाने भी ज़िंदाबाद
ज़ात फ़ना कर बैठे अपनी और नज़ीरें छोड़ गए

रामचरितमानस, रामायण, भगवद्गीता, वेद, पुराण
अभिनंदन उन पुरखों का जो ये जागीरें छोड़ गए

अल्का 'शरर' की ग़ज़लें

दिन भर तो उजली धूप सी निखरी रही हँसी
आयी जो शाम पलकों पे ग़म मुस्कुरा दिए

मधु मधुमन की ग़ज़लें

ख़्वाब देखे थे बुलंदी-ए-फ़लक के लेकिन
घर की देहलीज़ तलक पार नहीं कर पाए