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सत्यम भारती की ग़ज़लें

सत्यम भारती की ग़ज़लें

ख़ुशियों का पल उतरा है
बादल-बादल उतरा है

सारे जग का उजियारा
किरणों में ढल उतरा है

ग़ज़ल-

अपना सबकुछ अर्पित करके
क्या पाया उसका हित करके

मैंने कुछ वरदान दिये थे
लोटा ख़ुद को शापित करके

क्या पाया होगा मिट्टी ने
हम सबको यों निर्मित करके

कितना रोग जगा इस मन में
एक प्रेम को वर्जित करके

चाह रहे हैं नित्य सफलता
औरों का पथ बाधित करके

********


ग़ज़ल-

ख़ुशियों का पल उतरा है
बादल-बादल उतरा है

सारे जग का उजियारा
किरणों में ढल उतरा है

सीता तुम बचकर रहना
फिर कोई खल उतरा है

उम्मीदों की गठरी ले
आँखों में हल उतरा है

चढ़कर शोहरत की सीढ़ी
मन का संबल उतरा है

********


ग़ज़ल-

इतनी चाहत है इस मन में
हो ख़ुशहाली सदा वतन में

काँटे बोने वाले सुन ले
हम बोएँगे फूल चमन में

वो कैसे अपना सच बोले
बैठा है कबसे उलझन में

नारी को आकाश चाहिए
कब तक सिमटेगी आँगन में

ग़लती अक्सर हो जाती है
छोटी वय के कच्चेपन में

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रचनाकार परिचय

सत्यम भारती

ईमेल : satyamjnu1995@gmail.com

निवास : बेगूसराय (बिहार)

जन्मतिथि- 11 दिसम्बर, 1996
जन्मस्थान- वनद्वार (बेगूसराय)
संप्रति- प्रवक्ता हिंदी
शिक्षा- एम० ए०, पीएच० डी (अध्ययनरत)
प्रकाशन- बिखर रहे प्रतिमान (दोहा संग्रह) एवं सुनो सदानीरा (ग़ज़ल संग्रह) प्रकाशित
दोहे के सौ रंग, हलधर के हालात, यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, मौसम बदलने की आहट, ओ पिता!, सूली पर भगवान, ग़ से ग़ज़ल, कविताओं में माँ एवं फ़लक आदि समवेत संकलनों में रचनाएँ प्रकाशित
कविता कोश, गद्य कोश, अमर उजाला आदि पोर्टल पर रचनाएँ प्रकाशित
निवास- ग्राम व पोस्ट- वनद्वार, वार्ड नं०- 4, भाया-रजौड़ा, थाना- नीमा चाँदपुरा, ज़िला- बेगूसराय (बिहार)- 851131
मोबाइल- 8677056002