Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
तरुणा मिश्रा की ग़ज़लें

दरिया किसी की प्यास का सहरा से जा मिला
दोनों ने अपनी तिश्नगी आपस में बाँट ली

सत्य पी० गंगानगर की ग़ज़लें

अब कभी मिलना हुआ मुमकिन अगर
होंठ रक्खूँगा तुम्हारे पाँव पर

डॉ० नलिन की ग़ज़लें

एक हैं तन मन जहाँ  
बात क्या शह-मात की 

सत्यशील राम त्रिपाठी की ग़ज़लें

लील  जाती हैं सड़क पगडंडियाँ
काश पगडंडी भी सड़कों पर चढ़े