Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
शिवानी शान्तिनिकेतन की कहानी 'संदूक'

उसी रात एक तीखी बहस की आवाज़ सुनीता के कानों में पड़ी, जो कि उसके बेटे-बहु के कमरे से आ रही थी। उसे पता था कि इस बहस का कारण वही है। उसे लग गया था कि शायद अपने बाप की तरह अनिकेत को भी उसका डांसर होना पसंद नहीं आया। वह चुपचाप अपने कमरे में लौट आयी। उसने सोच लिया था, जो शौक़ उसके घर के कलह का कारण बने, उसे वह जड़ से ही ख़त्म कर देगी।

डॉ० मधु प्रधान की कहानी 'मैं हारूँगी नहीं'

वह जिएगी विनय की यादों के साथ, उसे तो भूलना सम्भव ही नहीं पर अब वह यथार्थ को नकारेगी भी नहीं। उसे ताई की सलाह स्वीकार है।उसका जी चाह रहा था कि वह उड़कर ताई के पास पहुँच जाए और उनकी गोद में मुँह छिपाकर जी भर कर रो ले व उनसे कहे कि ताई आप सही हो।

मौसमी चन्द्रा की कहानी 'सूर्यास्त'

वो उसे देखती रही। विदाई की बेला करीब थी। अपने प्रिय से बिछड़ने की पीड़ा आँखों से टपकने लगी। पतली धार अनगिनत झुर्रियों को पार कर ठोड़ी पर आकर ठहर गयी। उसने अपना सिर बूढ़े के कांधे पर टिका दिया।

महेश कुमार केशरी की कहानी 'धूप के रेशे मुलायम हैं'

पैतनपुर गाँव, जहाँ उसका जन्म हुआ था। बचपन से ही वो इस माहौल में पला-बढ़ा। उसके पिताजी भी कट्टे ही बनाते थे। कोई तीन-चार सौ लोग रहते हैं उस गाँव में। सबका यही व्यवसाय है। कट्टा बनाने का। लीगल तरीके से यहाँ कुछ नहीं होता।