Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
दिवाकर पांडेय 'चित्रगुप्त' की कहानी 'बंदनवार'

तभी, दूर से एक गाड़ी की आवाज ने सारी हलचल को ठहरा दिया। धूल का गुबार उड़ता हुआ दिखा, और एक सेना की गाड़ी जनवासे के पास रुकी। उसमें से कई जवान उतरे, उनके कदमों में अनुशासन और चेहरों पर गंभीरता थी। सबसे आगे सूबेदार साहब थे, जिनके चेहरे पर कर्तव्य की कठोरता स्पष्ट झलक रही थी। मंगल महतो की आँखें अपने बेटे को खोज रही थीं, पर वह कहीं नहीं दिखा। एक अनजानी आशंका उनके दिल को चीरने लगी।

शिवानी शान्तिनिकेतन की कहानी 'संदूक'

उसी रात एक तीखी बहस की आवाज़ सुनीता के कानों में पड़ी, जो कि उसके बेटे-बहु के कमरे से आ रही थी। उसे पता था कि इस बहस का कारण वही है। उसे लग गया था कि शायद अपने बाप की तरह अनिकेत को भी उसका डांसर होना पसंद नहीं आया। वह चुपचाप अपने कमरे में लौट आयी। उसने सोच लिया था, जो शौक़ उसके घर के कलह का कारण बने, उसे वह जड़ से ही ख़त्म कर देगी।

डॉ० मधु प्रधान की कहानी 'मैं हारूँगी नहीं'

वह जिएगी विनय की यादों के साथ, उसे तो भूलना सम्भव ही नहीं पर अब वह यथार्थ को नकारेगी भी नहीं। उसे ताई की सलाह स्वीकार है।उसका जी चाह रहा था कि वह उड़कर ताई के पास पहुँच जाए और उनकी गोद में मुँह छिपाकर जी भर कर रो ले व उनसे कहे कि ताई आप सही हो।

मौसमी चन्द्रा की कहानी 'सूर्यास्त'

वो उसे देखती रही। विदाई की बेला करीब थी। अपने प्रिय से बिछड़ने की पीड़ा आँखों से टपकने लगी। पतली धार अनगिनत झुर्रियों को पार कर ठोड़ी पर आकर ठहर गयी। उसने अपना सिर बूढ़े के कांधे पर टिका दिया।