Ira Web Patrika
अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
मनीष वैद्य की कहानी 'खिरनी'

नदी में नहाने के बाद वह झाड़ियों के पीछे अपने गीले कपड़ों को इतनी जोर से निचोड़ती कि पानी की आखरी बूँद तक निचुड़ जाए। फिर उन्हें धूप में सुखाती और उनके सूखने तक वहीं खरगोश की तरह दुबककर बैठी रहती। इधर लड़का भी रेत की ढेरियों पर अपने कपड़े सुखाता। कुछ गीले भी होते तो बदन पर सूख जाते। कपड़े सूखने पर ही वे घर या स्कूल लौट सकते थे। कभी घर में पता चलने पर उनकी पिटाई भी हो जाती लेकिन छुपते-छुपाते नहाने और नदी के ठंडे पानी में घंटों पड़े रहने का अपना मजा था।

रश्मि रविजा की कहानी 'चुभन टूटते सपनों के किरचों की'

'काँच के शामियाने' उपन्यास से चर्चा में आयीं रश्मि रविजा, जानी-मानी कथाकार और ब्लॉगर थीं। पिछले कुछ वर्षों में लेखन के साथ ही पक्षियों के प्रति अपने प्रेम के कारण भी उन्हें आदर से देखा गया। इसी वर्ष उन्होंने पक्षियों पर केन्द्रित एक कैलेंडर भी प्रकाशित कराया था। कैंसर की बीमारी ने कुछ ही समय पूर्व उन्हें असमय हमसे छीन लिया। रश्मि रविजा की इस कहानी के माध्यम से 'इरा परिवार' उन्हें अपनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

- गंगाशरण सिंह

सुधा गोयल की कहानी 'मीरा'

तुम्हारे प्रति अपराधी हूँ मीरा, लेकिन ऐसा एक सप्ताह पूर्व न था। मैं स्वयं को बेहद समझदार समझ बैठा था। मुझे स्वयं पर अभिमान हुआ था। इसका कारण खोजता हूँ तो लगता है कि मैं अकेला ही नहीं, तुम भी कहीं ज़रूर दोषी हो। तुमने मेरी इतनी तारीफ़ की, मेरी विद्धता की इतनी कायल हुई कि मैं स्वयं को बहुत बड़ा विद्वान समझ बैठा।

सीमा सिंह की कहानी 'अधूरा प्रायश्चित'

“सर, इमरजेंसी है, जली हुई औरत है, एट्टी परसेंट जली हुई है।” जूनियर डॉक्टर ने चैम्बर में झांक कर थोड़े हडबडाए स्वर में बताया तो मैंने झटपट लैपटॉप बंद किया और अपना गाउन और मास्क  उठा उसके साथ हो लिया।