Ira Web Patrika
नवम्बर-दिसम्बर 2025 संयुक्तांक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
सीमा सिंह की कहानी 'अधूरा प्रायश्चित'

“सर, इमरजेंसी है, जली हुई औरत है, एट्टी परसेंट जली हुई है।” जूनियर डॉक्टर ने चैम्बर में झांक कर थोड़े हडबडाए स्वर में बताया तो मैंने झटपट लैपटॉप बंद किया और अपना गाउन और मास्क  उठा उसके साथ हो लिया।

श्यामल बिहारी महतो की कहानी 'प्रेम न हाट बिकाय'

"मैं तो अभी भी आश्चर्यचकित हूँ। एक जानवर जिसे अपना नाम मालूम है। और पुकार सुनकर वह दौड़ा चला आता है। प्रेम और स्नेह का अद्भुत कांबिनेशन!”

राम नगीना मौर्य की कहानी 'तो अंत नहीं'

परिवार में शादी के सिलसिले में देवकान्त जी को गाँव जाना था। लगभग दस दिन की छुट्टियाँ बिताने के बाद जब वो ऑफिस आये तो सबसे पहले उनकी मुलाक़ात ऑफिस के डाक बाबू मोहसिन ख़ान से हुई। उसने उन्हें सुबह-सुबह वो सील-बंद लिफाफा रिसीव करवाते हुए उसे शीघ्र पढ़कर देखने को कहा था।
लिफाफा खोलते ही देवकान्त जी के होश उड़ गये।

शुभदा मिश्र की कहानी 'युगान्तर'

जब यह रसूख़दार आदमी इतनी ज़मीन घेर रहा है, तो हम क्यों न घेरें। अब तक उन घरों में नई पीढ़ियाँ आ चुकी थीं। यह नई पीढ़ी तो और भी शिक्षित, संपन्न, अमीरी और दिखावे के मारी ही थी। कानून के प्रति सहज बेपरवाह। सो वह सब भी अधिक से अधिक जगह घेरने लगे, बाकायदा दीवाल बनाकर। उस रसूख़दार ने तो शायद पूरा व्यावसायिक कॉमप्लेक्स बनाने की ही योजना बना डाली थी। बाक़ी कब्ज़ा करने वालें में भी मानो होड़ लग गई।