Ira Web Patrika
अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
डॉ० ज्योत्सना मिश्रा की कहानी - हिन्दी का मास्टर

"आप मुझे क़सम खिलायेंगे जल संरक्षण की? मैडम जी, आप अपने टॉयलेट में एक बार में जितना पानी बहा देतीं हैं हम लोग उतने में हफ्ता बिताते थे। आप के हाथ में जो यह प्लास्टिक की पानी की बोतल है न, इसी की वजह से हमारे डंगर प्यासे मर जाते हैं।"

कृष्ण बिहारी की कहानी- टेंशन

उसके साथ का पूरा संवाद अंगे्रजी में हुआ था। अगर वह हिन्दी बोल ही पाती तो उसे ट्यूशन की कोई खास जरूरत नहीं होती। वह बहुत सरल लगी। मगर उसकी सरलता भी एक पहेली जैसी ही अबूझ भी दिखी। मैंने डॉक्टर गुप्ता से भी उसके बारे में कुछ ज्यादा नहीं पूछा था। शाम को लगभग पाँच बीस पर मैंने उसकी कम्पनी ऑफिस की कॉल बेल दबाई। वह अकेली ही वहाँ थी।

उर्मिला शुक्ला की कहानी- बँसवा फुलाइल मोरे अँगना

अब तक तो बस एक ही बार वह मिसेज मल्होत्रा के करीब जा पाया था। वह भी बस कुछ घंटों के लिए। दीपा उसकी दोस्त थी, पत्नी नहीं। उसकी भी अपनी कुछ सीमायें थीं, सो सब कुछ आधा-अधूरा ही रह गया था। वह दृश्य उसकी आँखों में बार-बार उभरता रहा; मगर अब ? अब तो सारा का सारा समय उसका अपना होगा। कोई रोक टोक, कोई प्रतिबन्ध नहीं। अब वह क्लब का स्थायी मेम्बर होगा। सोचकर ही उसे रोमांच हो आया और उसकी आँखों की वह, चमक...!

इला प्रसाद की कहानी- दहशत

केमिकल फ़ैक्ट्रियों की गोद में बसा था यह हाई स्कूल। निवेदिता को अगर कुछ परेशान करता था तो वह उन फ़ैक्ट्रियों से उठने वाला रंगीन धुँआ था या फ़िर वह दुर्गंध जो किन्हीं खास दिनों में बादलों भरे आसमान से न निकल पाने की विवशता में उसके स्कूल तक तैर आती थी। सुबह-सुबह जब वह पार्किंग एरिया में कार पार्क करके बाहर आती तो लगभग दौड़ती हुई सड़क पार करती, सीढ़ियाँ चढ़, शीशे के बड़े दरवाजे को धकेलती, स्कूल में दाखिल हो जाती, साँस रोकती हुई।