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फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।

नीरज 'नीरू' के पंच चामर छन्द

नीरज 'नीरू' के पंच चामर छन्द

विदेश,देश में  बसी ,मनुष्य जाति बुद्ध हो,
अधर्म को तजें सभी,कि बैर हो न युद्ध हो।
करें कभी न कर्म यूँ, कि चित्त ही अशुद्ध हो,
बनें स्वयं सुदीप ही,कि बुद्धि भी न क्रुद्ध हो। 

सुगंध पुष्प की मिली प्रसन्न वायु हो गई,
सुगंध वायु को मिली प्रसन्न आयु हो गई।
खिली गली-गली हँसी धरा विभोर हो गई,
चली निशा, चली निशा नवीन भोर हो गई।
 
                   
विदेश,देश में  बसी ,मनुष्य जाति बुद्ध हो,
अधर्म को तजें सभी,कि बैर हो न युद्ध हो।
करें कभी न कर्म यूँ, कि चित्त ही अशुद्ध हो,
बनें स्वयं सुदीप ही,कि बुद्धि भी न क्रुद्ध हो। 

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रचनाकार परिचय

नीरजा 'नीरू'

ईमेल : neerjalal44@gmail.com

निवास : लखनऊ (उत्तर प्रदेश)

जन्मतिथि- 10 फ़रवरी 1977
जन्मस्थान- ग्राम परसेहरा ( जिला -लखीमपुर खीरी )
लेखन विधा- गीत ,छंद मुक्तक , छंदमुक्त 
शिक्षा- एम.ए., बी.एड.
सम्प्रति- प्रवक्ता
प्राकाशन- विभिन्न पत्र पत्रिकाओं व संकलनों में रचनाएं प्रकाशित
सम्मान- उड़ान साहित्य रत्न , प्राइड वीमेन ऑफ इण्डिया व अन्य अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित, वूमेन प्रेस्टीज अवार्ड, विभिन्न साहित्यिक मंचों से सम्मान। 
विशेष- १- गोष्ठियों का आयोजन व सहभागिया
          २- सचिव-उड़ान लखनऊ(अंतराष्ट्रीय साहित्यिक संस्था)
संपर्क- 5/243,जानकीपुरम विस्तार लखनऊ ।
मोबाइल- 9721720059