Ira Web Patrika
अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
देवेन्द्र कुमार पाठक 'महरूम' के गीत

हमने दुख को मीत बनाया !
 
हाथ हिला, कह 'हैलो' हँस दिया,
सुखाभास भुजपाश कस लिया,
पर अछोर आकाश दुखों का
दो आंखों में नहीं समाया, 
 
नयनकोर से बहा अश्रु बन
शोकगीत निःशब्द सुनाया।

जयराम जय के गीत

हों स्वप्न सभी साकार आपके 
नये साल में!
 
घर बाहर सूरज समृद्धि की 
किरणें बरसायें  
सन्ध्यायें सुख-सुविधाओं के
मंगल दीप जगायें
 
स्वागत के सामान लिये हों 
सभी थाल में!

मधु शुक्ला के गीत

ये महज संयोग है या लेख विधि का
टूटता यूँ ही नहीं घेरा परिधि का
मैं बनाती राह खुद पगडंडियों सी
आ मिली हूँ आज पनघट से तुम्हारे।

यतीन्द्र नाथ राही के गीत

 
रोज़ सवेरे  किरन कान में
कुछ कह कर जाती है
खिड़की के उस पार
डाल पर चिड़िया कुछ गाती है
कलियों के कहकहे गन्ध के
लुटते खील बताशे
किसने माँग सवारी ऋतु की
किसने अंग तराशे?