Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
संध्या सिंह के गीत

लिखूँ मोर की
कलगी पर मैं
घने घने कजरारे बादल
सहमी हिरनी के
पैरों मे
लिखूँ कुलाँचे जंगल-जंगल

पिंजरे के
तोता मैना को
पंखों का विस्तार लिखूँगी

सीमा अग्रवाल के गीत

ओढ़े अबीर पहने गुलाल
फगुआ की धुन पर
नाच रही
बगिया बगिया।

आराधना शुक्ला के गीत

वे मुस्कानों के प्यालों में
ग़म का शर्बत पीने वाले
जीवन को ठोकर दे-देकर
जीभर जीवन जीने वाले
वे दुविधाओं के धागों से
सुविधाओं का बाना बुनते
वे जो काँटों की सुइयों से
घावों का मुख सीने वाले
वे जो सागर को उबालकर
बादल में पानी भरते हैं
उन्हीं अग्निधारी सुमनों को
मौसम का हर ढंग मुबारक
दुनिया तुझको रंग मुबारक

आकृति विज्ञा 'अर्पण' के गीत

सच कहती हूँ सुनो साँवली,
तुमसे ही तो रंग मिले सब।
जब ऊँचे स्वर में हँसती हो,
मानो सूखे फूल खिले सब।