Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
वीणा चंदन के गीत

आए दिन उत्सव के
गीत के गुंजार के

कुछ सपने स्नेेहिल
छाँह छाँह पलते हैं
कुछ मरुथल रातों में
बूँद बूँद गलते हैं

झरते अंजुरियों में
फूल हरसिंगार के

सीमा अग्रवाल के गीत

यहाँ कोई किसे
समझा सकेगा
सभी हैं शून्य
सब ही सैकड़े हैं।

नेहा वैद्य के गीत

फिर पुराने पृष्ठ पलटे
समय ने चुपचाप उलटे
ले वही पुस्तक वही शब्दावली।
ज़िन्दगी आगे बढ़ी, आगे चली।।

नीरजा 'नीरू' के गीत

शत्रु संपत्ति समझीं गयीं नारियाँ
वस्तुओं के सदृश मोल उनका हुआ,
आपसी युद्ध हों याकि हों संधियाँ
वस्तु विनिमय सदृश तोल उनका हुआ।