Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
राहुल शिवाय के गीत

प्रीति-सौरभ इस हृदय में
क्यों बसाऊँ मैं
और कस्तूरी लिए
क्यों मृग सदृश भटकूँ
उर्वशी के रूप से
बींधा हुआ खग बन
क्यों हृदय की कामना को
पुरुरवा कर दूँ

राजीव राज के गीत

प्रतिबन्धों के बन्धन तोड़ें, संतृप्ति के पार चलें।
पिंजड़े तोड़ें सभी नापने अम्बर का विस्तार चलें ।।

देवेन्द्र कुमार पाठक 'महरूम' के गीत

हमने दुख को मीत बनाया !
 
हाथ हिला, कह 'हैलो' हँस दिया,
सुखाभास भुजपाश कस लिया,
पर अछोर आकाश दुखों का
दो आंखों में नहीं समाया, 
 
नयनकोर से बहा अश्रु बन
शोकगीत निःशब्द सुनाया।

जयराम जय के गीत

हों स्वप्न सभी साकार आपके 
नये साल में!
 
घर बाहर सूरज समृद्धि की 
किरणें बरसायें  
सन्ध्यायें सुख-सुविधाओं के
मंगल दीप जगायें
 
स्वागत के सामान लिये हों 
सभी थाल में!