Ira Web Patrika
अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
नेहा वैद्य के गीत

फिर पुराने पृष्ठ पलटे
समय ने चुपचाप उलटे
ले वही पुस्तक वही शब्दावली।
ज़िन्दगी आगे बढ़ी, आगे चली।।

नीरजा 'नीरू' के गीत

शत्रु संपत्ति समझीं गयीं नारियाँ
वस्तुओं के सदृश मोल उनका हुआ,
आपसी युद्ध हों याकि हों संधियाँ
वस्तु विनिमय सदृश तोल उनका हुआ।

राहुल शिवाय के गीत

प्रीति-सौरभ इस हृदय में
क्यों बसाऊँ मैं
और कस्तूरी लिए
क्यों मृग सदृश भटकूँ
उर्वशी के रूप से
बींधा हुआ खग बन
क्यों हृदय की कामना को
पुरुरवा कर दूँ

राजीव राज के गीत

प्रतिबन्धों के बन्धन तोड़ें, संतृप्ति के पार चलें।
पिंजड़े तोड़ें सभी नापने अम्बर का विस्तार चलें ।।