Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
रमेश गौतम के नवगीत

फिर घिनौने
क्षण हमें घेरे हुए
एक गौरेय्या गगन कैसे छुए

वसंत जमशेदपुरी के गीत

बरसाने की राधा हो तुम,
ब्रज का हूँ नटनागर मैं।
वृंदावन की कुंज गली तुम,
मैं यमुना का तीर प्रिये।

जयराम जय के नवगीत

परिवर्तन का ढोल पीटते
थके नहीं अभिनेता
कलयुग को भी बातचीत में
बता रहे हैं त्रेता
झूठ बोल करके ही सबका
मन कब से बहलाए

देवेन्द्र पाठक 'महरूम' के गीत

बिरला कोई किसी का बेटा
पढ़-लिख गर क़ाबिल बनता है,
सफल हुआ लेकिन नियुक्ति के
इन्तज़ार में दिन गिनता है,