Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
नींद हुआ मैं तुमसे गुस्सा : नवीन भाव-बोध की सरस कविताएँ- सुरेश चन्द्र 'सर्वहारा'

समीक्ष्य पुस्तक- नींद हुआ मैं तुमसे गुस्सा
विधा- बाल कविता
रचनाकार- योगेन्द्र प्रताप मौर्य
प्रकाशक- फ्लाइड्रीम्स पब्लिकेशन्स, नई दिल्ली
संस्करण- प्रथम, 2025
मूल्य- ₹160/-
पृष्ठ संख्या- 47

ग़ज़लों का एक सरस और पठनीय संग्रह : मुन्तज़िर हूँ मैं- के० पी० अनमोल

ग़ज़ल कहते समय वे (मंजुल निगम) रवायत का पूरा ध्यान रखती हुई हमारे दौर पर भी बराबर नज़र बनाए रखती हैं। उनकी ग़ज़लों में पारंपरिकता पूरी तरह मौजूद होने के साथ सम-सामयिकता भी देखने को मिलती है। दुनिया को देखने-समझने का अपना एक नज़रिया है इनके पास और उसी के दम पर वे अपने शेरों को बुनती हैं। जीवन-दर्शन के अलावा सरोकार तथा प्रेम इनकी ग़ज़लों का मुख्य कथ्य बनते हैं।

कुसुमलता सिंह की बाल-कहानियों का संग्रह : हवा की घंटी- सुरेन्द्र विक्रम

हवा की घंटी कुसुमलता सिंह की 10 बालकहानियों का संग्रह है, जिनमें एक ओर साहस तथा रोमांच है तो दूसरी ओर कुछ अच्छा करने का संकल्प और कठिन परिश्रम को ही सफलता का विकल्प मानने का फार्मूला बताया गया है। जीवन में सफलता के शिखर पर चढ़ने की कामना तो सब करते हैं लेकिन उसके लिए कठोर परिश्रम को अपनाने के लिए तैयार कम ही लोग होते हैं। जो कठिन परिश्रम करते हैं, सफलता आगे बढ़कर उनके चरण चूम लेती है।

जटिल मनःस्थितियों की उलझी हुई कविताएँ- रामकिशोर मेहता

यह कविता संग्रह भारत सहित पूरे विश्व को अपने विषय के रूप में समेटे है। ये इस काल के मानव संघर्ष की कविताएँ हैं। ये कविताएँ आम आदमी की पक्षधर हैं। कवि के शब्दों में- इनमें आत्मा की बेचैनियाँ हैं, प्रेम की उधेड़बुन हैं, फ़जीहतें हैं, दुरूहताएँ हैं और उनमें अपना रास्ता खोजने की कोशिशें हैं।