Ira Web Patrika
फरवरी 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। यह अंक श्रद्धेय गोविन्द गुलशन की स्मृतिओं को समर्पित है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
बोल जमूरे! बोल के बहाने अपने समय की पड़ताल- डॉ० लवलेश दत्त

पुस्तक में जनक छंद में निबद्ध छोटी-छोटी कविताएँ, जो कहीं कटाक्ष करती हैं, कहीं हमारी व्यवस्था पर प्रहार करती हैं, कहीं गुदगुदाती हैं तो कहीं आँखों को नम भी कर देती हैं।

सादगी के साथ अपने दौर के अनुभवों और भावनाओं का शेरों में बयान: आसमां तू ही बता- अशोक रावत

ऐसे बहुत कम ग़ज़ल संग्रह हाथ में आते हैं जिनको एक बार पढ़ना शुरू करने के बाद उसे पढ़ते जाने का मन करे। मक़सूद अनवर साहब की  ग़ज़लों में खास बात जिसने मुझे प्रभावित किया वह है बड़ी सादगी के साथ उनका अपने दौर के अनुभवों  और भावनाओं को शेरों में बयान करते जाना. शायर शेर में अपने नज़रिये से किसी बात को कहता है लेकिन उसके अर्थ कहाँ  तक जाते हैं इसकी कोई सीमा नहीं है।