Ira Web Patrika
अप्रैल-जून 2026 अंक पर आपका हार्दिक अभिनन्दन है। आपकी अमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहेगी।
नए प्रयोग और सशक्त कहन का नायाब नमूना : मकड़जाल- रामकुमार भाम्भू

संग्रह में सात लम्बी कहानियाँ हैं, जिनमें से अधिकतर किसी न किसी पत्रिका में छपी है और शेष छपने के लिए स्वीकृत हैं। नई विषय-वस्तु और कहन का अंदाज़ लम्बी कहानियों को पठनीय बना देता है।

जीवन की हकीकत की शायरी: पागल-पागल कहते लोग- के० पी० अनमोल

पागल-पागल कहते लोग आसान भाषा और सरल कहन की अच्छी शायरी का पठनीय संग्रह है। आधारशिला प्रकाशन की अनुभवी टीम ने इसे साफ़-सुथरे और सुंदर ढंग से प्रकाशित किया है।

बार-बार उग ही आएँगे : ज़िन्दगी के नए नज़रिये का गीत-  डॉ० ज़ियाउर रहमान जाफ़री

हिंदी नवगीत में जो चंद नाम सबसे ज़्यादा लोगों का ध्यान खींच रहे हैं, उनमें एक नाम गरिमा सक्सेना का भी है। बार-बार उग ही आएँगे उनका सद्य प्रकाशित पचास गीतों का संग्रह है। किताब के नाम से ही ज़ाहिर है गरिमा तमाम अवरोधों के बावजूद भी उग आने का साहस रखती हैं। उनकी भाषा गीत के अनुकूल नर्म, सरस, मुलायम और कोमल है।

सामाजिक संवेदनाओं से पूरित बेहतरीन लघुकथाएँ-डॉ० सत्यनारायण सत्य

समीक्ष्य पुस्तक- लघुकथा कौमुदी
रचनाकार- शकुंतला अग्रवाल 'शकुन'
प्रकाशक- साहित्यागार, धामाणी मार्केट की गली, चौड़ा रास्ता, जयपुर
संस्करण- प्रथम, 2022
पृष्ठ संख्या-112
मूल्य- 200 रुपए